
उद्धव ठाकरे ने शिवसेना विधायकों की बुलाई बैठक (Photo: IANS/File)
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के भीतर बढ़ते असंतोष व संभावित टूट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पांच लोकसभा सांसदों के पार्टी से अलग होने और बाद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब ठाकरे गुट के सांसद संजय देशमुख ने मातोश्री की बैठक में शामिल होने के बजाय दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिवसेना सांसद प्रतापराव जाधव से मुलाकात की।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि सांसदों का कोई समूह अलग होता है तो वह पहले अलग संसदीय गुट बनाकर बाद में शिंदे सेना में विलय का रास्ता अपना सकता है। ठीक वैसे ही जैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने अलग समूह बनाकर त्रिपुरा की एनसीपीआई (NCPI) में विलय किया।
रविवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सभी नौ लोक सभा सांसदों की बैठक मातोश्री में बुलाई थी। बैठक में केवल चार सांसद व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि पांच सांसद अनुपस्थित रहे। हालांकि उद्धव गुट का दावा है कि अनुपस्थित सांसद ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए थे।
इसी बीच, बैठक में नहीं पहुंचे उद्धव गुट के वाशिम से सांसद संजय देशमुख सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के आवास पर पहुंचे। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया।
दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद व केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से उनके सांसद असंतुष्ट हैं। जाधव ने कहा, "असल शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे के पास है। ऐसे में उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद भी महसूस करते हैं कि उन्हें वास्तविक शिवसेना का हिस्सा होना चाहिए, भले ही वे किसी अन्य चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हों।"
उन्होंने यह भी कहा कि ठाकरे गुट के सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में खुद को अधिक सहज महसूस करते हैं।
सांसदों की बगावत को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में बैठक के दौरान भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा, "आज मेरा समय नहीं है, लेकिन कल जरूर मेरा होगा। जो लोग जाना चाहते हैं, वे कहीं भी जा सकते हैं, लेकिन बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ने के बाद उन्हें पछतावा जरूर होगा।"
उद्धव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी धैर्य बनाए रखने की अपील की। उन्होंने याद दिलाया कि पहले 40 विधायक और चार सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, यहां तक कि उनकी सरकार भी गिरा दी गई थी, लेकिन संघर्ष जारी रखना ही उनका रास्ता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत का एक ट्वीट भी चर्चा का विषय बन गया है। राउत ने त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के अलग होकर दूसरी पार्टी में विलय का उदाहरण देते हुए लिखा कि महाराष्ट्र में यदि कोई राजनीतिक टूट होती है तो बागी नेताओं को भी संवैधानिक प्रावधानों के तहत किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश करनी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राउत का यह बयान महाराष्ट्र में संभावित राजनीतिक हलचल की ओर संकेत कर सकता है, हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी टूट की संभावना से इनकार किया जा रहा है।
दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने सांसदों के टूटने की खबरों को अफवाह करार दिया है। पुणे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि विपक्षी दलों को तोड़ना, उनके चुनाव चिन्ह और नाम छीनना भाजपा (BJP) की सियासी रणनीति का हिस्सा है। यह सब भाजपा सत्ता के हवस और संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए कर रही है।
उन्होंने कहा, "जो सांसद मशाल चुनाव चिन्ह पर और जनता के विश्वास के साथ जीतकर आए हैं, वे सभी हमारे साथ हैं। उद्धव ठाकरे ने हमेशा अपने साथियों पर भरोसा किया है। किसी को भी अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।"
इस बीच शिंदे गुट के नेता कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि ठाकरे गुट के सात लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और उचित समय आने पर वे शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' पूरी तरह सक्रिय है और जरूरत पड़ने पर इसे अमल में लाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं के बीच महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मातोश्री बैठक में अनुपस्थित सांसदों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और पार्टी नेताओं के बयानों में सामने आए विरोधाभासों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है। हालांकि शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व लगातार एकजुटता का दावा कर रहा है।
Published on:
16 Jun 2026 11:04 am
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