95 साल पहले बेल्जियम से आया था कांच, नक्काशियों में दर्ज है जैन इतिहास

मंदिर या शीशमहल : बेल्जियम से मंगवाए गए कांच में थ्री-डी इफेक्टर के साथ बना था यह दिगंबर जैन मंदिर...

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Dec 23, 2016
amazing digambar jain kanch mandir in indore
इंदौर। शहर के बीचो-बीच व्यस्ततम इलाके में जहां राजवाड़ा जैसी ऐतिहासिक इमारत शहर की पहचान बनी हुई है, उसी से कुछ ही दूरी पर एक ऐसा मंदिर है जो फिल्म मुगले-आजम के शीशमहल की याद दिलाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट होता है, यह मंदिर पूरी तरह से शीशे का बना है। छत और दीवारें ही नहीं, नीचे का फर्श भी कांच का है। इसीलिए इसे कांच मंदिर कहा जाता है।

इस दिगंबर जैन मंदिर को सेठ हुकुमचंद ने बनवाया था और इसके सौ साल पूरे होने में मात्र पांच साल बचे हैं। मंदिर कुछ इस तरह से बना है कि थ्री-डी इफेक्ट आता है। किसी भी एंगल से खड़े होकर देखो तो यही लगता है कि एक के भीतर एक कई कमरे हैं। कांच कोई साधारण कांच नहीं है, इसकी कीमत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह बेल्जियम से मंगवाया गया था। इसके अलावा भी मंदिर में काफी खर्च किया गया, उदाहरण ही काफी है कि लकड़ी का बड़ा दरवाजा पूरी तरह चांदी की परत से मढ़वाया गया था।

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जयपुर से आई थी मुख्य मूर्ति
मंदिर की मुख्य मूर्ति श्री शांतिनाथ भगवान की है। मूर्ति काले पत्थर कि बनी है, जो जयपुर से बनकर आई थी। इस मूर्ति के दोनों तरफ श्री चंद्रप्रभा भगवान और आदिनाथ भगवान हैं। केवल मूर्ति ही नहीं बल्कि कारीगरी और कांच की नक्काशी भी ईरान और जयपुर के कारीगरों ने की थी।

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मंदिर की खासियत यह भी है कि इसमें पूरा जैन इतिहास कांच की नक्काशियों में दर्ज है।

- जैन परंपरा की कहानियां।
- जैन धर्म की संकल्पना की व्याख्या।
- मुख्य जैन तीर्थों का परिचय।
- मंदिर के इतिहास और सेठ हुकमचंद के परिवार की जानकारी।
Published on:
23 Dec 2016 01:08 pm
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