
इजरायल ने लेबनान में कहर बरपाया। ( फोटो: सोशल मीडिया)
Airstrikes: मध्य पूर्व में तनाव अब अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। एक तरफ जहां इजरायली सेना लेबनान पर ताबड़तोड़ बमबारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक मोर्चे पर भी भयंकर जुबानी जंग जारी है। ताजा घटनाक्रम में लेबनान के विभिन्न इलाकों में हुए इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इसी बीच, ईरान ने अमेरिका द्वारा बनाए जा रहे आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों के अभियान की कड़ी आलोचना करते हुए उसे पूरी तरह से बेअसर बताया है और अमेरिकी नीतियों का जमकर मजाक उड़ाया है।
इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी और सीमावर्ती क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए अपने हवाई हमले काफी तेज कर दिए हैं। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा है। मलबे में तब्दील हो चुकी इमारतों से 9 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि कई अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। इजरायल का दावा है कि वह आतंकी ठिकानों को नष्ट कर रहा है, लेकिन इन हमलों में आम नागरिकों की जान जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश और चिंता बढ़ गई है। आसमान से बरसते बारूद ने लेबनान में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।
एक तरफ युद्ध के मैदान में खून बह रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान ने कूटनीतिक मंच पर अमेरिका को खुली चुनौती दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान पर लगाए जा रहे भारी आर्थिक प्रतिबंधों और 'अधिकतम दबाव' वाले अभियान को तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने वाशिंगटन की इन नीतियों का उपहास उड़ाते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी आर्थिक हथकंडा ईरान के पक्के इरादों को डिगा नहीं सकता। ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका की ये धमकियां अब पुरानी और खोखली हो चुकी हैं।
इस दोहरे मोर्चे पर भड़के तनाव से पूरे मध्य पूर्व में एक व्यापक युद्ध छिड़ने की आशंका बहुत गहरी हो गई है। इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते हिंसक टकराव और अमेरिका-ईरान के बीच तीखी बयानबाजी से वैश्विक शांति को सीधा खतरा पैदा हो गया है। दुनिया भर की निगाहें अब इसी बात पर टिकी हैं कि क्या इस विनाशकारी युद्ध को किसी कूटनीतिक तरीके से रोका जा सकेगा या फिर हालात पूरी तरह से बेकाबू हो जाएंगे।
रक्षा और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में नागरिकों की मौत से हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष और भी ज्यादा हिंसक रूप ले सकता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों पर ईरान की बेपरवाही यह साफ दर्शाती है कि तेहरान अब किसी भी दबाव के आगे झुकने और पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन बैठक और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। लेबनान सरकार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है, जिस पर अमेरिका और इजरायल के अगले कूटनीतिक कदम निर्भर करेंगे।
बहरहाल,इस युद्ध का सीधा और विनाशकारी असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव ऐसे ही बढ़ता रहा, तो 'हर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाले तेल व्यापार पर बड़ा संकट आ सकता है, जिससे पूरी दुनिया में रातों-रात महंगाई आसमान छूने लगेगी।
Published on:
30 Apr 2026 08:21 pm
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