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ईरान के नए सुप्रीम लीडर की ट्रंप को खुली धमकी, ‘समुद्र की गहराई में होगी अमेरिकियों की जगह’, बयान से बढ़ी हलचल

Iran Supreme Leader Statement 2026: ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा बयान दिया है। होर्मुज जलमार्ग, परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी क्षेत्र को लेकर उनके रुख से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के संकेत हैं।

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 30, 2026

Mojtaba Khamenei

Mojtaba Khamenei (Image: Gemini)

Mojtaba Khamenei vs Trump: खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिकियों की कोई जगह नहीं है, उनकी जगह समुद्र की गहराई में है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रंप पर सीधा निशाना

मोजतबा खामेनेई ने अपने लिखित संदेश में कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और रणनीतिक क्षमताओं से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि बाहरी ताकतों को खाड़ी क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

हॉरमुज पर नियंत्रण को लेकर क्या बोला ईरान?

ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज (Strait of Hormuz) का नया प्रबंधन क्षेत्र में शांति लाएगा और दुश्मनों के दुरुपयोग को खत्म करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब यह रणनीतिक समुद्री मार्ग पहले से ही वैश्विक राजनीति का केंद्र बना हुआ है।

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर सख्त रुख

खामेनेई ने साफ कहा कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को राष्ट्रीय संपत्ति मानता है और इसकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि देश की वैज्ञानिक, तकनीकी और सैन्य क्षमताएं ईरान की पहचान हैं और इन्हें किसी दबाव में कम नहीं किया जाएगा।

खाड़ी क्षेत्र को लेकर बड़ा दावा

अपने बयान में उन्होंने कहा कि भविष्य में फारस की खाड़ी का क्षेत्र अमेरिका से मुक्त होगा और यह क्षेत्र केवल यहां के लोगों की प्रगति और समृद्धि के लिए काम करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दूर-दराज से आने वाली विदेशी ताकतों का इस क्षेत्र में कोई स्थान नहीं है।

तनाव बढ़ने के संकेत

इस तरह के तीखे बयान से अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव और बढ़ सकता है। खासतौर पर हॉरमुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी भी तरह का बदलाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।