
Asaram : दुष्कर्म का आरोपी आसाराम पैरोल पर रिहा हो चुका है। राजस्थान में हाईकोर्ट के आदेश पर उसे छोड़ा गया। जेल से बाहर आने के बाद आसाराम एक अस्पताल में गया और अपनी जांच कराई। इसके बाद जोधपुर के आश्रम में चला गया। पैरोल विवाद के बाद आसाराम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाते हुए उसे जोधपुर की अदालत ने उम्रकैद दी थी। इस मामले में आसाराम को इंदौर से अरेस्ट कर जोधपुर ले जाया गया था। हालांकि उसने गिरफ़्तारी से बचने का हर पैंतरा आजमाया। यहां तक कि पुलिस पर दबाव डालने के लिए इंदौर के आश्रम पर 2 लाख अनुयायियों को आने का आव्हान किया। खंडवा रोड पर आसाराम के हजारों समर्थकों ने खूब हो हल्ला मचाया भी था पर पुलिस के सामने उनकी एक नहीं चली।
इंदौर के लोग 31 अगस्त 2013 की रात अभी भी नहीं भूले हैं। तब आसाराम के समर्थकों ने खूब उत्पात मचाया था। आसाराम पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप लगा था और पुलिस ने बाकायदा शिकायत दर्ज कर ली थी। जोधपुर की एक पुलिस टीम उसे अरेस्ट करने इंदौर आई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए आसाराम तिकड़मों पर उतर आया। वह पुलिस को छकाने के लिए जुट गया।
आसाराम को जोधपुर पुलिस के आने की भनक लग गई थी।वह पहले प्रवचन करता रहा और इसके बाद खंडवा रोड स्थित आश्रम के ही एक कमरे में छुप गया। कई घंटों तक मशक्कत करने के बाद आखिरकार पुलिस अधिकारी ने सख्त तेवर अख्तियार कर लिए। आसाराम को साफ चेताया कि हम दरवाजा तोड़ देंगे तब जाकर उसका कमरा खुला।
गिरफ्तारी से बचने के लिए आसाराम और उसके बेटे नारायण सांई ने खूब नाटक किए थे। पिता पुत्र अपने अनुयायियों को पुलिस के खिलाफ भड़का रहे थे। यहां तक कि आश्रम में 2 लाख समर्थकों के आने का आव्हान किया था। बड़ी संख्या में अनुयायी एकत्रित भी हो गए और हंगामा करने लगे।
प्रशासन को इसका अंदेशा था, इसलिए आश्रम के सामने बड़ी संख्या में इंदौर का पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। पुलिस अधिकारी कुछ घंटों तक सारा तमाशा देखते रहे। अंतत: अपना रौद्र रूप दिखाया और देर रात को आसाराम को अरेस्ट कर उसे जोधपुर ले गए।