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Navratri 2026: पेड़ों में ‘उल्टे नारियल’ बांधने से पूरी होती है हर मनोकामना, इंदौर के इस मंदिर में लगती है भीड़

Shardiya Navratri 2026: नवरात्र के दौरान आंबा वाली माता मंदिर की अनूठी परंपराएं भक्तों को आकर्षित कर रही हैं, जहां उल्टी परिक्रमा की जाती है और मनोकामना पूरी होने की आस में नारियल आम के पेड़ पर बांधे जाते हैं।
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आंबा वाली माता मंदिर(Photo Source - Patrika)

आंबा वाली माता मंदिर(Photo Source - Patrika)

Shardiya Navratri 2026: रविवार से नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगना शुरू हो गई है। एमपी के इंदौर शहर में देवी आराधना की परंपराएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई मंदिरों की विशिष्ट मान्यताएं भक्तों की आस्था को अलग पहचान देती हैं। कहीं मनोकामना की आस में पेड़ पर नारियल बांधे जाते हैं, तो कहीं माता की परिक्रमा सामान्य दिशा से उल्टी की जाती है। एमआर 10 स्थित दिव्य शक्तिपीठ में मां दुर्गा, कालिका और सरस्वती के दर्शन के साथ हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध ज्वाला देवी मंदिर से लाई गई अखंड ज्योत श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्र पर पत्रिका आपको शहर के ऐसे ही अनूठे देवी मंदिरों से रूबरू करा रहा है।

आमतौर पर मंदिरों में भगवान को दायीं ओर रखते हुए परिक्रमा की जाती है, लेकिन आंबा वाली माता मंदिर में इसके विपरीत दिशा में परिक्रमा करने की परंपरा है। पुजारी परमार के अनुसार, भक्तों की मान्यता है कि उल्टी परिक्रमा करने पर माता की नजर उन पर पड़ती है और उनका कल्याण होता है।

सूखे आम के पेड़ से प्राकट्य, अब नारियलों से लदा पेड़

मंदिर में करीब 40 वर्ष पहले सूखे आम के पेड़ से माता का स्वयंभू प्राकट्य होने की मान्यता है। भक्तों ने उन्हें आंबा वाली माता नाम दिया। माता का स्वरूप पावागढ़ की काली माता के मुख स्वरूप जैसा है। कहते हैं यहां मां कालरात्रि के रूप में निवास करती हैं। पुजारी पुरण सिंह परमार कहते हैं, भक्त मनोकामना लेकर यहां आते हैं और तीन नारियल अर्पित करते हैं। इसके बाद नारियल आम के पेड़ पर बांध दिए जाते हैं। भक्तों का कहना है कि ऐसा करने से उनकी मनोकामना पूरी होती है।

माता के आशीर्वाद से महिलाओं को मिला संतान सुख

मान्यता है कि मंदिर में हर मंगलवार निःसंतान महिलाओं की गोद भराई भी की जाती है। माता को नारियल, फूल और प्रसाद अर्पित करने के बाद महिलाओं की गोद में गेहूं, नारियल आदि दिए जाते हैं। मान्यता के अनुसार, माता के आशीर्वाद से महिलाओं को भी संतान सुख मिला है।

दिव्य शक्तिपीठ में तीन देवियों के दर्शन

शहर के एमआर-10 स्थित दिव्य शक्तिपीठ में मां दुर्गा के साथ कालिका माता और सरस्वती माता के दर्शन होते हैं। यहां हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध ज्वाला देवी मंदिर से लाई गई ज्योत करीब तीन वर्षों से अखंड रूप से प्रज्वलित है। पीठ की प्रमुख दिव्या गुप्ता बताती हैं कि माता की ज्योत हिमाचल से तीन दिन में लाई गई थी। छह गाड़ियों में भक्त ज्योत को गोद में रखकर लेकर आए थे। इस बार नवरात्र में ज्योत का तीसरा स्थापना दिवस भी मनाया जाएगा। नवरात्र पर्व को देखते हुए मंदिर को नारियल और मौली से सजाया गया है। नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान होंगे। दिव्य शक्तिपीठ का गरबा भी खास है। यहां केवल लड़कियां गरबा करती हैं। नवरात्र के दौरान देवी आराधना के साथ यह आयोजन मंदिर परिसर में आकर्षण का केंद्र रहेगा। नवरात्र के नौ दिन शहर में धूम रहेगी। शहर के देवी मंदिरों में चूनर यात्राएं निकलेंगी तो कहीं धार्मिक आयोजन होंगे।