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13 फ्लैट, 5 डुप्लेक्स और 3 करोड़ रुपए हड़पने का आरोप, भोपाल में बिल्डर पर केस दर्ज, दोस्ती बढ़ाकर दिया धोखा

Case registered against builder: निराला गृह निर्माण समिति के बिल्डर अब्दुल शाहिद पर 13 फ्लैट और 5 डुप्लेक्स दिलाने के नाम पर 3 करोड़ 1 लाख 93 हजार रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
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बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- AI)

बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- AI)

Bhopal news:मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में फ्लैट और डुप्लेक्स दिलाने के नाम पर 3 करोड़ 1 लाख 93 हजार रुपए की धोखाधड़ी मामले में कोहेफिजा पुलिस ने निराला गृह निर्माण समिति के बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि लालघाटी की ग्रीन एकड कॉलोनी निवासी रमेश भावनानी ने कोहेफिजा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप लगाया है कि बिल्डर अब्दुल शाहिद ने उनसे 13 फ्लैट और 5 डुप्लेक्स दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए लिए, लेकिन 13 साल बीतने के बाद भी न तो संपत्तियों का कब्जा दिया और न ही पूरे रकम वापस किए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, लंबे समय तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर मामले में कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

बिल्डर ने किया था संपर्क

रमेश भावनानी ने अपनी शिकायत में बताया कि 2012 में बीडीए कॉलोनी कोहेफिजा निवासी बिल्डर ने उनसे संपर्क किया था। खुद को बिल्डर और डेवलपर बताया। बाद में उसने मिसरोद स्थित निराला गृह निर्माण सहकारी समिति का अध्यक्ष होने की बात कहते हुए एक प्रोजेक्ट में फ्लैट और डुप्लेक्स दिलाने का भरोसा दिया। फिर अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर 13 फ्लैट और 5 डुप्लेक्स खरीदने के लिए 3,01,93,000 रुपए दिए। इस संबंध में त्रिप क्षीय अनुबंध भी किए गए थे। अनुबंध के मुताबिक, चार साल में निर्माण पूरा कर रजिस्ट्री कराने और कब्जा सौंपने की बात तय हुई थी।

प्रोजेक्ट का नक्शा बदलने का आरोप

आरोप है कि तय समय बीतने के बाद उन्हें केवल आश्वासन मिलते रहे। इस बीच प्रोजेक्ट की योजना बदल दी गई और फ्लैटों के बजाय डुप्लेक्स का निर्माण कराया गया। वह रकम समिति के खाते में जमा करने के बजाय निजी उपयोग में ली गई। टीआइ ने बताया कि जांच में धोखाधड़ी सामने आने पर बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में दस्तावेजों और लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई और निर्माण कार्य में उसका कितना उपयोग हुआ। जांच के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा।