- संचालन में स्टार्ट अप से ही मिल कर बना फायदे का लोक परिवहन इंदौर मॉडल - इलेक्टि्क व सीएनजी बसों के लिए कर रहे प्रयोग
इंदौर, सिटी रिपोर्टर।
शहरों में वाहनों की रेलमपेल को कम करने के लिए सरकारें बेहतर और ग्रीन लोक परिवहन के मॉडल की तलाश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी स्वच्छता के साथ स्वच्छ एनर्जी आधारित लोक परिवहन की पैरवी कर रहे हैं। सरकारें इसके लिए स्टार्ट अप से अपेक्षा कर आशाभरी नजरों से देख रही है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड ( एआईसीटीएसएल ) ने आशा की किरण दिखाते हुए सरकारी व निजी कंपनियों का साझा स्टार्ट अप मॉडल पेश किया है। इसमें नवाचारी आइडियाज को पोषित करते हुए लोक परिवहन को बेहतर, पब्लिक उपयोगी बनाने के साथ ही खर्च व कमाई के बीच के अंतर को शून्य करके फायदे की ओर ले जा रहे हैं। इंदौर का ईवी और सीएनजी बस ऑपरेशन मॉडल इसका बड़ा उदाहरण है। इनमें संचालन के लिए पैसे देने के बजाय, सिटी बस कंपनी को फायदा हो रहा है।
इंदौर एआईसीटीएसएल के पूर्व सीइओ अपर कलेक्टर संदीप सोनी ने कोच्चि में आयोजित अरबन मोबोलिटी इन इंडिया कॉन्फ्रेंस में सरकारों की इस चिंता का हल कुछ इस तरह प्रस्तुत किया है। उन्होंने लोक परिवहन के संचालन मॉडल का विश्लेषण करते हुए बताया, सिटी बस द्वारा संचालित विभिन्न तरह के लोक परिवहन के संचालन को निजी कंपनियों के नवाचारी प्रयोगों के साथ सफल बनाया है। संचालन को फायदे में लाने और लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार व ऑपरेटर कंपनियां नवाचारी आइडियाज को लागू करते हुए एक स्टार्ट अप की तरह कार्य कर रहा है। इस मॉडल की खास बात यह है, यह स्टार्ट अप मॉडल युवा स्टार्ट अप के आईडियाज को पोषित और एक्सलरेट करते हुए काम कर रहा है।
बेहतरी के लिए यह जरूरत
उन्होंने बताया, वर्तमान लोक परिवहन के लिए सबसे बड़ी समस्या पैसे की है। इसके संचालन खर्च और कमाई के बीच जो बड़ा अंतर है, उसे कम करने के लिए प्रयास जरूरी है। इसके लिए बसों की संख्या में वृध्दि करना है, इनमें ग्रीन फ्युल का उपयोग बढ़ाना है। इनका उपयोग सुविधाजनक तरीके से करने के लिए आईटी सर्विसेस का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है। जिससे इनकी गुणवत्ता, समय पाबंद देख कर लोग इनमें बैठने के लिए आकर्षित हो और इनकी राइडरशिप बढें।
इंदौर ने यह किया
लोक परिवहन में सबसे बड़ी समस्या प्रारंभिक िस्थति में होने वाला घाटा है। इसे पूरी तरह से ऑपरेटर पर नहीं डाल सकते है। इंदौर इसके लिए अलग-अलग तरह के फाइनेंशियल मॉडल पर काम किया और एक सस्टेनेबल मॉडल तैयार किया है। जिससे दस साल में दस गुना राइडरशिप बढ़ी, बसों की संख्या में लगातार बढ़ौतरी हो रही है। इसके लिए लगातार छोटी-छोटी कंपनियों के साथ काम किया। इसका परिणाम यह रहा, ईवी बस संचालन में भरपाई जैसे मॉडल बाहर हो गए।
इस तरह बढ़ी राइडर शिप
- वर्ष-2012 में 22654 लोग सफर करते थे
- वर्तमान में 259932 लोग सफर कर रहे
कुछ प्रयोग इस तरह किए गए।
- क्लस्टर बना कर 40 इलेक्टि्रक बसों का संचालन कर रहे हैं।
- मिक्स व ग्रास कॉस्ट मॉडल से 100 बस का संचालित कर रहे।
- इलेक्टि्रक बसों का इंफ्रा स्ट्रक्चर बनाने के साथ कंपनियों को बिजनेस के अवसर दे रहे है।
- तकनीकी स्टार्ट अप का सपोर्ट, एप और अन्य इनोवेशन जैसे पेंसेजर एप, ई-पासेस, डिजिटल टिकिटिंग, टेप इन व टेप आउट सुविधा।
इन स्टार्ट अप के साथ प्रयोग
- चलो - 400 मिडी बस का ऑपरेशन और अब 80 ई-बस की तैयारी
- इवी उर्जा - बैटरी स्वैपिंग टेक्नॉलाजी प्रोवाइडर
- सफल पीएसबी माय बाइक, 1000 सायकल का संचालन
- ई-रिक्शा - 100 ई-रिक्शा महिलाओं के साथ ऑपरेट की जा रही
- चार्जिंग सुविधा के प्रयास - अब ई-चार्जर के लिए सुविधा दे रहे। इसके लिए 46 चार्जिंग स्टेशन सोलर के प्रयोग से आगे बढ़ाने की योजना।