सीलिंग की जमीन पर छूट लेने वाली 180 संस्थाओं पर सरकारी नकेल, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगी सीलिंग एक्ट से छूट की एंट्री
मोहित पांचाल
इंदौर। गृह निर्माण संस्था के सदस्यों को न्याय दिलाने के लिए चल रहे मैच में कलेक्टर रहे मनीष सिंह ने आखरी बॉल पर सिक्सर मारकर भू-माफियाओं को बाउंड्री पार कर दिया है। सीलिंग एक्ट में छूट लेकर जमीन खरीदने वाली 180 संस्थाओं को लेकर एक बड़ा आदेश जारी कर दिया गया है। अब संस्था बिना कलेक्टर की अनुमति के जमीन की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकती हैं। वहीं, जिन संस्थाओं ने शर्तों का उल्लंघन किया, उनकी जमीन सरकारी हो जाएगी।
इंदौर में बड़ी समस्याओं की बात करें तो सबसे पहले गृह निर्माण संस्थाओं का घोटाला सामने आता है। सैकड़ों की संख्या में संस्थाएं हैं, जिनमें हजारों सदस्य हैं। अधिकतर संस्थाओं पर भू माफियाओं ने कब्जा कर लिया और सदस्य अपने हक के प्लॉट के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देश पर कई बार मुहिम चलाई गई लेकिन माफियाओं की चतुराई के आगे सरकारी सिस्टम फेल हो गया। माफियाओं के साथ जमीन के खेल में कोई ओर नहीं सहकारिता विभाग के कुछ अफसर भी शामिल रहते थे जिसकी वजह से कोई ना कोई गली निकल आती थी।
पहली बार कलेक्टर मनीष सिंह ने जमीन के जालसाजों के चक्रव्यूह में घुसकर उसे भेदने का काम कर दिया। अयोध्यापुरी, पुष्प नगर और महालक्ष्मी नगर में सदस्यों को प्लॉट दिलवाए। अन्य संस्थाओं को लेकर भी प्रयास कर रहे थे, लेकिन कोई ना कोई पेंच निकलकर सामने आ रहा था। पिछले दिनों अपर कलेक्टर राजेश राठौर जब एक कॉलोनी की जांच कर रहे थे, तब उनके हाथ सीलिंग एक्ट की धारा 20 लग गई। समझने के बाद कलेक्टर सिंह को जानकारी दी गई तो वे सारा खेल समझ गए।
सीलिंग एक्ट लागू होने के बाद संस्थाओं ने गरीब व कमजोर वर्ग को प्लॉट का हवाला देकर जमीन को मुक्त कराई थी, लेकिन सदस्यों को प्लॉट ना देते हुए संस्थाओं ने खरीद-फरोख्त कर दी। सिंह ने धारा- 20 की छूट लेने वाली संस्थाओं की सूची तैयार कराई। उसमें आंकड़ा 180 का सामने आया। ऐसी सभी संस्थाओं को लेकर कलेक्टर सिंह ने तबादला होने से पहले सख्त आदेश जारी कर टीएंडसीपी, आइडीए और नगर निगम को पत्र जारी कर दिया है। इसके अलावा जिला पंजीयक भी बिना अनुमति रजिस्ट्री नहीं कर सकते हैं।
संस्थाओं की सूची भी भेजी गई है। जिसमें साफ किया है कि वे कॉलोनी का नक्शा, डायवर्शन और विकास अनुमति सहित कैसी भी अनुमति देने से पहले कलेक्टर से अभिमत लें। साथ में राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के खसरों पर सीलिंग एक्ट की धारा 20 से छूट प्राप्त भी लिखा जा रहा है ताकि जमीन की खरीद-बिक्री पर अंकुश लगाया जा सके। 180 संस्थाओं की कुल 500 हेक्टेयर से अधिक जमीन है जिन पर अब सीधा-सीधा प्रभाव पड़ रहा है। आम आदमी को मालूम पड़ जाएगा कि जमीन विवादित है।
एसडीएम करेंगे विवादास्पद मामलों की जांच
तत्कालीन कलेक्टर सिंह ने आदेश में सभी एसडीएम को सीलिंग एक्ट की धारा 20 में सरकारी होने से बचने वाली जमीन की जांच करने के भी निर्देश दिए हैं। एसडीएम पहले देखेंगे कि शर्तो पर ली जमीन संस्था ने अपने सदस्यों को नियमानुसार दी है या नहीं। अगर गलत तरीके से प्लॉट बेचे हैं तो उनका प्रस्ताव बनाकर सरकार को दिया जाएगा। दूसरा कदम संस्था द्वारा माफियाओं को जमीन बेचने का है। इसमें शर्तों का उल्लंघन करने वालों पर सरकार को जमीन सरकारी करने का प्रस्ताव बनाकर दिया जाएगा। ऐसे में कई माफियाओं की जमीन धराशाई हो जाएगी।
संस्थाओं को देंगे नोटिस
वैसे तो प्रशासन को मालूम है कि कौन सी संस्था ने क्या गड़बड़ी की है। सरकार से गरीबों को प्लॉट देने के लिए छूट ली लेकिन शर्तो का उल्लंघन किया। इसके बावजूद प्रशासन सभी संस्थाओं को नोटिस देगा। उसके बाद जवाब भी मांगेगा और बकायदा प्रकरण की सुनवाई होगी और गड़बड़ी होने पर कार्रवाई की जाएगी।
अब हो सकता है सदस्यों का भला
गौरतलब है कि सिंह ने आदेश देकर मास्टर स्ट्रोक खेला। अधिकांश संस्थाओं की नियत में खोट थी जिसकी वजह से सदस्यों को वे प्लॉट नहीं दे रहे थे। अब ऐसा पेंच फंस गया है कि उन्हें सदस्यों को प्लॉट देने में ही फायदा है। इस बहाने से वर्षों से भटक रहे सदस्यों को प्लॉट मिलने की उम्मीद एक बार फिर जाग गई है।