ट्रेचिंग ग्राउंड में लगेगा प्लांट
नितेश पाल @ इंदौर. शहर में निकलने वाले प्लास्टिक से नगर निगम अब डीजल बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए प्लांट ट्रेचिंग ग्राउंड पर लगाया जाएगा। ये प्लांट सोमवार से लगना शुरू होगा और 20 जनवरी तक इसका काम पूरा हो जाएगा। इससे रोजाना 4 हजार लीटर तक डीजल बनेगा। ये डीजल बाजार मूल्य से आधी कीमत का होगा।
शहर से निकलने वाले 1100 मैट्रिक टन कचरे में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक होता है। इस कचरे को अभी तक नगर निगम यहां पर बने कचरा संग्रहण केंद्र के प्लांट में अलग-अलग छांटकर उससे प्लास्टिक के दाने और सीमेंट फैक्ट्री और सडक़ बनाने के लिए रॉ मटेरियल तैयार करवाती है। इसके लिए प्लास्टिक के कचरे को अलग-अलग छांटना होता है। लेकिन इस नए प्लांट में सभी तरह का प्लास्टिक का कचरा सीधे इस्तेमाल होगा। 10 टन क्षमता का ये प्लांट नगर निगम फिलहाल एक माह के ट्रायल बेस पर लगवाएगा। निगम इस प्लांट को लगाने वाली कंपनी ग्रीन अर्थ को ट्रेचिंग ग्राउंड में लगभग 5 हजार वर्गफीट जगह उपलब्ध कराएगी। जहां पर कंपनी अपनी मशीनरी लगागी। इस प्लांट में रोजाना 8 से 10 टन तक प्लास्टिक का उपयोग करते हुए उससे साढ़े तीन हजार से लेकर 4 हजार लीटर डीजल तैयार करेगी। चूंकी निगम इस पर कोई खर्चा नहीं करेगी इसके चलते ये डीजल फिलहाल कंपनी का ही होगा।
रिवर्स पॉलिमराइजेशन तकनीक पर काम
प्लास्टिक से डीजल बनाने का काम रिवर्स पॉलिमराइजेशन तकनीक से किया जाएगा। चूंकि प्लास्टिक भी पेट्रोलियम पदार्थों से ही बनता है। इस तकनीक में प्लास्टिक के साथ केडेलिस्ट मिलाकर उसे रिएक्टर के जरिए दोबारा पेट्रोलियम पदार्थ में लौटाकर उसका डीजल बनाया जाएगा।
रैगपिकर्स से खरीदेंगे प्लास्टिक वेस्टेज
ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरे को फिलहाल रैगपिकर्स छांटकर उसे यहां मौजूद कंपनी को बेचते हैं। इससे उनका रोजगार चलता है। निगम इसे खत्म नहीं करते हुए प्लांट को दिए जाने वाला प्लास्टिक भी रैगपिकर्स से ही खरीदने की शर्त पर दे रही है। रैगपिकर्स को कंपनी को उनके द्वारा लाए गए कचरे का पैसा देना होगा।
चूंकि हम कचरे का पुन: उपयोग करने के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं, इसके चलते ही हम इस प्लांट लगाने जा रहे हैं। फिलहाल ट्रायल बेस पर लगने वाले इस प्लांट के नतीजों को देखने के बाद ही हम इस पर आगे काम करेंगे।
- मालिनी गौड़, महापौर