इंदौर

डॉक्टर ने बताया घर पर ‘ब्रेस्ट क्रैंसर’ चेक करने का आसान तरीका ! ये 3 लक्षण न करें इग्नोर

Breast cancer: महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों में शुरुआती लक्षण नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। स्व-परीक्षण से 65% मामले पहले चरण में पकड़े गए।
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Updated: 27 Oct 2026, 12:40 PM IST
अस्पताल और कैंसर सेल, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
अस्पताल और कैंसर सेल, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

Breast cancer: आज के समय में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये बीमारी अगर थोड़ा सा भी लेट पता चलती है तो इंसान की जान भी जा सकती है। बदलती लाइफस्टाइल के दौर में महिलाओं में तेजी से ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने आ रहे है। डॉक्टर्स का मानना है महिलाओं द्वारा शुरुआती समय में लक्षण को इग्नोर करना बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। महिलाओं को स्तन का नियमित स्व परीक्षण क्षण करने से कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान करने में मदद मिल सकती है।

पीजीआई लखनऊ के विशेषज्ञ सर्जन डॉ. अभिषेक कृष्णा ने एक साल के अध्ययन के आधार पर बताया कि स्व स्तन परीक्षण के प्रति जागरूकता से 65 प्रतिशत मामलों में मरीज बीमारी की पहली अवस्था में अस्पताल पहुंचे। समय पर इलाज मिलने से इनमें 90 प्रतिशत से अधिक मरीजों के स्वास्थ्य में अच्छा सुधार हुआ। उन्होंने महिलाओं को असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी।

95 प्रतिशत गांठें कैंसरग्रस्त नहीं

टाटा मेमोरियल, मुंबई के विशेषज्ञ डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के शोध के अनुसार, स्तन कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाले कैंसर में शामिल है। देश में हर साल स्तन कैंसर के करीब डेढ़ लाख नए मामले सामने आ रहे हैं। स्तन में होने वाली लगभग 95 प्रतिशत गांठें कैंसरग्रस्त नहीं होतीं. लेकिन शेष मामलों में गंभीर बीमारी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दर्द नहीं होने से देर से पता चलता है कैंसर

डॉ. दिलीप कुमार के अनुसार, स्तन कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर दर्द नहीं होता। इसके कारण महिलाएं समय पर जांच नहीं करातीं और कई मामलों में बीमारी की पहचान होने तक कैंसर उन्नत अवस्था में पहुंच जाता है। करीब 60 प्रतिशत मरीज बीमारी की उन्नत अवस्था में या कैंसर के शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई महिलाएं पहले सामान्य चिकित्सकों या घरेलू डॉक्टरों से जांच कराती हैं, जहां बीमारी की पहचान नहीं हो पाती। उन्होंने बताया कि तीन साल के अध्ययन में शुरुआती अवस्था में इलाज कराने वाली महिलाओं में जीवित रहने की दर 92 प्रतिशत तक रही।

भारी पड़ सकती हैं 3 लापरवाही

-ब्रेस्ट में गांठों को इग्नोर न करें।
-अचानक आकार बदले तो हो जाएं सतर्क।
-किसी तरह का रिसाव हो तो तुरंच डॉक्टर को दिखाए।

पांचवें से दसवें दिन तक करें परीक्षण

डॉ. अभिषेक कृष्णा के अनुसार, महिलाओं के लिए स्व स्तन परीक्षण एक उपयोगी तरीका है। माहवारी के पांचवें से दसवें दिन तक स्तन का परीक्षण करना चाहिए। नियमित परीक्षण के दौरान स्तन के आकार और रंग में बदलाव, गांठ या निप्पल से किसी प्रकार का स्राव होने जैसे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर ऐसा कोई भी लक्षण दिखता है तो ये आपको शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। किसी भी प्रकार का बदलाव नजर आने पर ब्रेस्ट सर्जन, ऑन्को सर्जन या प्लास्टिक सर्जन से तुरंत जांच करानी चाहिए।

Updated on:
27 Oct 2026, 12:40 PM IST
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