ऑड-ईवन ट्रैफिक नियंत्रण, डोर-टू-डोर उपचार के बाद अब ई-पासपोर्ट को लेकर भी नया सिस्टम तैयार
इंदौर। कोरोना संकट में परेशानियों के बीच कई अवसर तलाशे गए हैं। जो आने वाले समय में लोगों के लिए सुलभ होंगी। इंदौर में कोरोना काल में ऑनडोर किराना सामानों की सप्लाई, ऑड-ईवन ट्रैफिक नियंत्रण, मरीजों का निगरानी एप, डोर-टू-डोर मरीजों का उपचार के बाद अब ई-पासपोर्ट को लेकर भी नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त अन्य विभागों ने अधिकांश काम ऑनलाइन शुरू कर दिया है। अब घर बैठे ऑफिस का काम या फिर जरूरी सामानों की भी खरीद कर सकेंगे।
बढ़ते साइबर अपराध, पासपोर्ट फ्रॉड और कोरोना संक्रमण जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए ई-पासपोर्ट सेवा 2021 तक शुरु करने को लेकर तैयारी की जा रही है। भारत सरकार अगले साल से अत्याधुनिक सुरक्षा फ़ीचरे से लेस ई-पासपोर्ट जारी करेगी। ई-पासपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोप्रोसेसर (Electronic Microprocessor) लगा होगा जिससे इसकी नकल करना मुश्किल हो जाएगा और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के मामले में इमिग्रेशन की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकेगी। ई-पासपोर्ट से पासपोर्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी।
नहीं काटने पड़ेंगे पासपोर्ट ऑफिस के चक्कर
मध्यप्रदेश की आर्थिक और वाणिज्यिक राजधानी इंदौर में बीते 22 फरवरी से पासपोर्ट सेवा लघु केंद्र की औपचारिक शुरुआत हो गई है। इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम नम्बर 140 में नवनिर्मित बहुमंजिला इमारत ‘आनंद वन’ में करीब 11,000 वर्ग फुट में फैले पासपोर्ट सेवा लघु केंद्र की शुरुआत से विशेषकर इंदौर और उज्जैन संभाग को सबसे ज्यादा फायदा मिला।
मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा पासपोर्ट इंदौर संभाग में ही बनते हैं। पासपोर्ट विभाग के अनुसार 50 फीसदी पासपोर्ट इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर और आसपास के जिलों के बनते हैं। इन जिलों के पासपोर्ट इच्छुकों को अब भोपाल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जहां उन्हें पासपोर्ट बनवाने के लिए 2-3 दिनों का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन आने वाले दिनों में ई-पासपोर्ट सेवा शुरु होने से लोगों को पासपोर्ट बनवाना और साइबर अपराध, पासपोर्ट फ्रॉड से भी निराकरण मिलेगा।