
National Institute of Technology (NIT) हैदराबाद में पढ़ने वाला 20 साल का राजकुमार कुशवाह सीनियर छात्रों की धमकियों से परेशान था। उसे सीनियरों ने कहा था कि हम तुझे पढ़ाई करने नहीं देंगे और पास भी नहीं होने देंगे। छह लाख रुपए का लोन लेकर इंजीनियरिंग करने हैदराबाद गया यह छात्र धीरे-धीरे डिप्रेशन में आ गया था। परिजन उसे किसी भी पल अकेला नहीं छोड़ रहे थे, लेकिन गुरुवार को सिर्फ पांच मिनट के लिए परिजन कमरे से बाहर गए और इसी बीच इस होनहार युवक ने आत्महत्या कर ली।
आत्महत्या किसी मसले का समाधान नहीं होता है, यह सभी जानते हैं, लेकिन इंदौर के गौरीनगर में रहने वाले राजकुमार कुशवाह ने यह गलत कदम उठा लिया। जिस उम्र में बेटे को माता-पिता की सेवा करना होती है, अब माता-पिता मेहतन करके उसकी शिक्षा का लोन भरेंगे।
राजकुमार कुशवाह का एनआईटी हैदराबाद में चयन हुआ था। वो फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट था। परिजनों का कहना है कि कालेज में कुछ सीनियर छात्र उसे परेशान करते थे। उसे धमकाते थे कि पढ़ाई नहीं करने देंगे और परीक्षा में भी पास नहीं होने देंगे। शुरुआत में राजकुमार ने हालात का सामना करने का प्रयास किया, लेकिन जब करियर बर्बाद होने का डर उसके मन में बढ़ने लगा तो वो इंदौर लौट आया। हीरानगर थाना क्षेत्र में अपने घर आने के बाद उसने माता-पिता को पूरी बातें बताई। परिवार ने भी उसे समझाया कि पढ़ाई छोड़ने का फैसला गलत नहीं है और वह घर पर रहकर जो चाहे काम कर सकता है। हालांकि राजकुमार के मन में एक ही चिंता लगातार बनी हुई थी कि पढ़ाई के लिए लिया गया छह लाख रुपए का एजुकेशन लोन कैसे चुकाएंगे। परिवार ने हिम्मत दी कि सभी मिल-जुलकर मेहनत करेंगे और धीरे-धीरे लोन चुका देंगे।
परिजनों ने बताया कि कुछ दिनों से उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। यही कारण है कि उसे अकेला नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन गुरुवार को सिर्फ पांच मिनट के लिए बाहर गए। इसी दौरान राजकुमार ने आत्महत्या कर ली। परिजनों ने यह देखा तो घबरा गए और उसे तुरंत पास ही के अस्पताल ले गया,जहां डाक्टरों ने राजकुमार को मृत घोषित कर दिया। पुलिस का कहना है कि छात्र की मौत के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि परिजनों की ओर से लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों के बारे में साक्ष्य मिलते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इन सब परेशानियों के बीच 20 साल के राजकुमार ने आत्महत्या जैसा गलत कदम उठा लिया। इसका खामियाजा परिजनों को भुगतना पड़ेगा। अब माता-पिता पर जवान बेटे का साथ छूट जाने का गम और एजुकेशन लोन चुकाने का भार आ गया है। इसलिए आप भी अपने परिवार के सदस्यों को हिम्मत दें और ऐसी परिस्थितियों में समझदारी से काम लें।