
इंदौर. इंदौर का एक व्यक्ति महज ढाई साल में गरीबों का अनाज बेच-बेचकर करोड़पति बन गया। उसने शहर के तीन इलाकों में करोड़ों रुपए के 7 मकान खरीद लिए और अब जब पकड़ में आया तो उसे बचाने के लिए वकीलों की बड़ी टीम लग गई जिसकी वजह उसका एक बड़े कांग्रेस नेता का दामाद होना बताया जा रहा है। गरीबों का अनाज बेचकर करोड़पति बनने वाले आरोपी का नाम मोहम्मद इमरान है जिसके पास से चावल के करीब 27 कट्टे बरामद किए हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि गरीबों का अनाज लेने के लिए आरोपी ने अपनी एक पूरी टीम लगा रखी थी। जानिए पूरा मामला...
ढाई साल में गरीबों का अनाज बेचकर बना करोड़पति
कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में सरकार ने गरीबो को फ्री में अनाज देने का ऐलान किया। बस इसी से आरोपी इमरान का शातिर दिमाग चला और उसने ऐसी गैंग बना डाली जिसने महज ढाई साल में ही आटा चक्की चलाने वाले इमरान को करोड़पति बना डाला। बाद में पीएम गरीब कल्याण योजना में फ्री में मिलने वाले सरकारी अनाज को भी आरोपी ने खरीदना शुरु कर दिया और दिन रात माल कमाकर मालामाल होता गया। पुलिस को बीते दिनों सरकारी योजना के तहत मिलने वाले राशन की कालाबाजारी होने की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस ने पूरी तफ्तीश की और आरोपी इमरान को उसकी गैंग के सदस्यों के साथ गिरफ्तार किया। उसकी गैंग में महिलाएं भी शामिल हैं। आरोपी के पास से 27 कट्टे चावल भी बरामद किया गया है जो गरीबों को बांटा गया था।
ऐसे हुआ मालामाल
आरोपी इमरान अपनी गैंग के सदस्यों के जरिए गरीबों को मिलने वाला राशन 15-16 रुपए में डायरेक्ट गरीबों से खरीद लेता था। उसने इसके लिए 20 ऑटो ले रखे थे जो राशन दुकानों के बाहर ही खड़े रहते थे और वहीं पर गरीबों को मिले राशन गेहूं व चावल को खरीदते थे। इसके बाद इस गेहूं को इमरान की आटा चक्की पर लाया जाता था जहां अनाज को पीसकर इमरान अपने अनाज नाम के ब्रांड से आटा दुकानों पर अच्छे दामों पर बेच देथा था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी ने बताया कि लॉकडाउन में कई लोग रिक्शे से अनाज लेकर उसके पास पिसवाने के लिए आते थे और उसे तभी इस बात का आइडिया आया फिर उसने रिक्शा चालकों से संपर्क बढ़ाया और हर महीने कमीशन देने की बात कहकर उनसे राशन की खरीदारी करवाने लगा।
ढाई साल में खरीदे सात मकान
पुलिस के मुताबिक इमरान की प्रॉपर्टी को लेकर जानकारी निकाली जा रही है। पता चला है कि उसने ढाई साल में करीब सात मकान इस कारोबार से खरीदे हैं जो कि आजाद नगर, उषा गंज और खजराना सहित अन्य इलाके में होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह हर माह लाखों रुपए का अनाज इधर से उधर करता था। वह छोटे दुकानदारों के साथ कुछ फैक्ट्रियों को भी आटा उपलब्ध करवाता था।