High Court: हाईकोर्ट की जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने पार्ट टाइम कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं में सरकार की नीतियों को लेकर ये टिप्पणी की है।
High Court: संविधान के अनुच्छेद 14 की आवश्यकता को पूरा करने वाले वर्गीकरण और भेदभाव में तर्कसंगतता को उचित ठहराने के लिए एक अलग नीति अपनाते हुए भेदभाव की अनुमति नहीं दी जा सकती। रोजगार में समानता बनाए रखने की आवश्यकता है और इसलिए परिस्थितियों और प्रतिवादियों की कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए, जो एक सजातीय वर्ग बनाने वाले कर्मचारियों के मामले में संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हुए एक पिक एंड चूज पद्धति को अपनाते हैं, भेदभावपूर्ण कार्रवाई को इस न्यायालय द्वारा बरकरार नहीं रखा जा सकता है।
हाईकोर्ट की जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने पार्ट टाइम कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं में सरकार की नीतियों को लेकर ये टिप्पणी की है। हाईकोर्ट में नर्मदाघाटी विकास प्राधिकरण में कार्यरत रहे पार्ट टाइम एप्लाई बसोरीलाल सिहोसे याचिका दायर कर बताया था कि 1983 से नौकरी पर रहने के बाद वे 31 दिसंबर 2021 को रिटायर हो गए थे। उन्हें क्रमोन्नति व पदोन्नति के लाभ नहीं दिए गए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि सरकार ने पार्ट टाइम कर्मचारियों के लिए एक परिपत्र जारी किया था, जिसमें ऐसे कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से लाभ देने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने इस परिपत्र को भी खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को 1 अप्रेल 1999 से क्रमोन्नति और 1 अप्रेल 2006 से समयबद्ध वेतनमान के लिए हकदार करार दे दिया।