इंदौर

एमपी में वरिष्ठता के आधार पर होगी प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Promotion- ओल्ड जीडीसी प्रभारी प्राचार्य विवाद में फैसला हाईकोर्ट ने बदला उच्च शिक्षा विभाग का आदेश, वरिष्ठता को प्राथमिकता
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Apr 05, 2026
High Court Verdict on Appointments to Administrative Posts in MP Based on Seniority
High Court Verdict on Appointments to Administrative Posts in MP Based on Seniority (फोटो- Patrika.com)

Promotion- एमपी में प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों के संबंध में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसी नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर ही होगी। प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों के लिए पदनाम को वरिष्ठता का आधार नहीं माना जा सकता। इंदौर में शासकीय माता जीजाबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (ओल्ड जीडीसी) में प्रभारी प्राचार्य विवाद पर हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया। इसके साथ ही राज्य सरकार को नियमित प्राचार्य की नियुक्ति तक डॉ. शर्मा को प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार सौंपने के निर्देश दिए। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने वरिष्ठता को प्राथमिकता देते हुए कहा कि प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर ही होगी। इसी के साथ कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग का आदेश भी बदल दिया।

मामला जून 2025 का है, जब नियमित प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने पर डॉ. मंजू शर्मा को दरकिनार करते हुए प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार 30 जून 2025 को डॉ. अशोक सचदेवा को सौंप दिया गया। 29 जुलाई 2025 को उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया।

कोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति 12 सितंबर 1983 को सहायक प्राध्यापक (गृह विज्ञान) के रूप में हुई और 8 दिसंबर 2006 को पदोन्नति देकर प्रोफेसर बनाया

डॉ. मंजू शर्मा ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति 12 सितंबर 1983 को सहायक प्राध्यापक (गृह विज्ञान) के रूप में हुई और 8 दिसंबर 2006 को पदोन्नति देकर प्रोफेसर बनाया गया। वहीं, डॉ. अशोक सचदेवा की नियुक्ति 15 नवंबर 1983 को हुई और 30 अक्टूबर 1989 को नियमित हुए। उन्हें 13 जून 2018 को केवल प्रोफेसर का पदनाम दिया गया।

तर्क दिया गया कि यह पदनाम ही वास्तविक पदोन्नति है

कोर्ट में डॉ. सचदेवा की ओर से भी पक्ष प्रस्तुत किया गया। उनकी तरफ से तर्क दिया गया कि यह पदनाम ही वास्तविक पदोन्नति है और यूजीसी नियम 2010 में पदोन्नति, नियुक्ति और पदनाम को समान माना गया है।

हालांकि कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत दी गई पिछली तारीख से प्रभावी पदनाम, नियमित पदोन्नति से प्राप्त वरिष्ठता को समाप्त नहीं कर सकता। 2018 का आदेश वास्तविक पदोन्नति नहीं माना जा सकता। यूजीसी नियम केवल वेतन और अकादमिक स्थिति के लिए लागू होते हैं, प्रशासनिक वरिष्ठता के लिए नहीं।

हाईकोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नियमित प्राचार्य की नियुक्ति तक डॉ. शर्मा को प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार सौंपा जाए।

Updated on:
05 Apr 2026 12:12 pm
Published on:
05 Apr 2026 12:12 pm