
Indore Fire Tragedy Big Update: 'मेरी इलेक्ट्रिक कार से आग नहीं फैली। उसे तो मैंने चार्जिंग पर लगाया ही नहीं था। कार में उस रात चार्जर भी नहीं था। ऐसे में उसमें शॉर्ट सर्किट कैसे हो सकता है? जो वीडियो इंस्टाग्राम पर चल रहे हैं, उनमें आप देख सकते हैं। इलेक्ट्रिक पोल पर ब्लास्ट हुआ। जब घर में आग लगी तो ग्राउंड फ्लोर पर सो रहे माता-पिता को सबसे पहले पता चला था। उन्होंने दरवाजा खोला। बाहर देखा तो ईवी कार के साथ पोर्च में खड़ी बाइक जल रही थी।'
यह कहना है इंदौर के रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ का। बुधवार तड़के तिलकनगर थाना क्षेत्र की बृजेश्वरी एनेक्स कॉलोनी में पुगलिया परिवार के आठ सदस्यों की घर में जिंदा जलने से मौत हो गई थी। गुरुवार को एमजी रोड स्थित जैन श्वेतांबर तेरहपंथी सभागृह में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सौरभ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद चुप्पी तोड़ी और आग पर काबू पाने में बरती गई लापरवाहियां उजागर की।
सौरभ ने कहा कि मां सहित हम चार सदस्य जिंदा बच निकले, हमें खरोंच तक नहीं आई। फिर क्यों अन्य आठ लोगों की जान नहीं बच पाई? सब फायर ब्रिगेड की लापरवाही है। 100 प्रतिशत उनकी गलती है। पहले फायर वाहन लाए तो पानी खत्म, हौज पाइप बिछाने में समय खराब किया। टैंकर आधा घंटे में पानी लाया। बाद में पता चला कि घर में पानी भर गया लेकिन इलेक्ट्रिक सप्लाई चालू है। पुलिस को सबसे पहले इलाके की इलेक्ट्रिक लाइन बंद करवानी थी। लाइन बंद नहीं हुई और आग बुझाने को घर में पानी डाल दिया। जब मैं घर में घुसा तो वहां पानी भरा था। क्या पता परिवार के सदस्यों की जान करंट लगने से चली गई हो। बाद में मैंने आग्रह किया कि गैस लाइन बंद करवाई जाए, नहीं तो पूरी कॉलोनी में आग फैल सकती है।
सौरभ ने बताया, जब घर में आग लगी तो हमने डॉयल-100, 112 पर कई फोन लगाए। लोगों को शोर मचाकर बुलाया। सभी को कहा कि आप भी फोन लगाओ, पुलिस को बुलाओ। सबसे पहले पुलिसकर्मी दोपहिया वाहन से पहुंचे। मौके पर पुलिसकर्मी बढ़ते गए लेकिन फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस नहीं आई। डेढ़ घंटे बाद भी फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची। जब आई तो उसके कर्मचारी पाइप की रील निकालने में व्यस्त हो गए। थोड़ा पानी घर पर डाला और खत्म हो गया। बाद में एक टैंकर पीछे से आया। उसे कहा गया कि फायर वाहन के पीछे टैंकर ले जाओ। वह पिछली गली से टैंकर घुमाकर लाया। जाने वह कौन से नशे में था। उसने इस चक्कर में आधा घंटा खराब कर दिया। मैं वहां दमकलकर्मी को बोलता रहा कि पानी वहां डालो जहां परिवार के सदस्य फंसे हैं। इस पर दमकलकर्मी कहने लगे कि आपको मालूम है तो आप पानी डाल लो। आग बुझा लो।
सोशल मीडिया पर चल रही मनगढ़ंत खबरों को लेकर भी सौरभ नाराज हुए, बोले- मेरे घर के किसी भी दरवाजे पर डिजिटल लॉक नहीं है। चाहो तो चेक कर लो। लोहे के दरवाजे के पीछे लकड़ी का दरवाजा है। हां, छत पर हमने चैनल गेट पर जरूर ताले लगाए थे।
सौरभ ने बताया कि दमकलकर्मियों को फटाफट पानी के पाइप की रील निकालनी चाहिए थी। वे एक-एक रील निकाल समय खराब करते रहे। मैं चिल्लाता रहा कि एक घंटा होने आया, एंबुलेंस नहीं आई। घर में फंसे सदस्य किस हालत में होंगे, इस पर पुलिसकर्मी कहने लगे कि हम हमारे वाहन से उन्हें लेकर जाएंगे। पूरे समय मैं कहता रहा कि उसमें आइसीयू नहीं है। कैसे परिजन की जान बचाई जा सकती है।
सौरभ ने कहा कि जब कोई मदद के लिए आगे नहीं आया तो वे दोस्त के साथ घर में फंसे परिजन को बचाने जाने लगे। उनके दोस्त छत पर पहुंच गए। पीछे से पुलिसकर्मी भी आ गए। किसी का हाथ तो किसी का पैर जल गया। उन्होंने छत पर देखा कि लॉक चैनल गेट के पास पत्नी सिमरन और पिता मनोज मृत अवस्था में मिले।
सौरभ ने कहा कि हमने घटना के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बात की। उन्हें भी घटना के वीडियो दिखाए। इस पर उन्होंने कहा कि मैंने वीडियो देखे हैं। जांच के लिए भोपाल की टीम गठित की है।