
Indore Fire Tragedy: इंदौर शहर में आठ लोगों के जिंदा जलने के बाद एक बार फिर फायर एक्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकारें कभी चिंतित नहीं रहीं। करीब 10 साल बाद भी प्रदेश में फायर एक्ट लागू नहीं हो सका। इसे लेकर विधानसभा में सवाल हुए और हर बार जल्द लागू करने का आश्वासन ही मिला। वर्ष 2016 में तत्कालीन विधायक सुदर्शन गुप्ता ने विधानसभा में पूछा था कि प्रदेश में फायर एक्ट कब लागू होगा। तब तत्कालीन मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने दावा किया था कि जल्द ही इसे लागू करेंगे। हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने का दावा करते हुए करीब तीन माह का समय दिया था।
सिर्फ NOC तक सीमित फायर सेफ्टी, सख्त कानून का अभाव
अग्नि हादसों पर क्विक रिस्पांस, सावधानी, अग्नि शमन उपकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर का शहर की जनसंख्या के आधार पर विकास, परीक्षण आदि के लिए फायर एक्ट जरूरी है। केंद्र ने ड्राफ्ट राज्यों को भेजा था, लेकिन प्रदेश में लागू नहीं हुआ। फायर ब्रिगेड सर्विस नगरीय निकायों के अधीन है। एक जैसा कानून नहीं होने से बिल्डिंग में आग से बचाव के इंतजाम न करने वालों पर कठोर सजा का प्रावधान नहीं है। पूरा फोकस सिर्फ फायर एनओसी को लेकर ही है। नगर निगम एनओसी को लेकर ही सख्ती करता है। एनओसी लेने के बाद इन उपकरणो के वास्तविक स्टेटस का कभी परीक्षण नहीं होता है। एनओसी के काम में लेटलतीफी होती है। मंत्री विजयवर्गीय ने हाल ही में विधायक अभिलाष पांडे के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर विधानसभा में जवाब दिया था कि प्रदेशभर के निकायों से जानकारी मांगी है।
उसके आधार पर डाफ्ट तैयार कर फायर एक्ट लागू करेंगे। एक साल में एक्ट के आधार पर इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य संसाधन तैनात किए जाएंगे। कोशिश रहेगी कि 10 मिनट में शहर में कहीं भी अग्नि दुर्घटना होने पर मौके पर पहुंच जाएं। मालूम हो, केंद्र ने वर्ष 2016 में मप्र में एक्ट लागू करने के निर्देश दिए थे। 2019 में मॉडल फायर एक्ट बनाकर मंत्रिपरिषद में भेजा गया, लेकिन तभी केंद्रीय फायर एक्ट में बदलाव हुए। फाइल वापस नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भेजी गई। 2020 में इसे प्रमुख सचिव के पास भेजा, लेकिन कांग्रेस की सरकार बदल गई। नई सरकार ने एक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
फायर एक्ट लागू होने के फायदे
यहां फायर एनओसी जरूरी
सिर्फ फायर एनओसी नहीं, एक्ट भी जरूरी
फायर सेफ्टी होनी चाहिए, ताकि लोग सुरक्षित रहें। जिस बिल्डिंग में हम रहते या काम करते हैं. वहां फायर एनओसी होने के बावजूद उपकरणों के चालू होने की स्थिति पता नहीं की जाती है। उपकरणों को ऑपरेट करना भी लोगों को नहीं आता है। फायर एक्ट में ऐसी व्यवस्था लागू करवाने का अधिकार फायर ऑफिसर को होगा। पुलिस स्टेशन की तरह फायर स्टेशन होंगे। नियमों की अनदेखी करने वालों या हादसे के जिम्मेदारों पर कार्रवाई का प्रावधान होगा। इसे कानून की परिधि में लाने के लिए फायर एक्ट होना जरूरी है। सिर्फ फायर एनओसी ले लेना पर्याप्त नहीं है।- प्रकाश राजदेव, फायर सेफ्टी एक्सपर्ट