इंदौर

indore new :हॉन्टेड मानी जाने वाली ‘फूटी कोठी’ पर पुरातत्व विभाग का कब्जा, अंग्रेजों के जमाने से है चर्चित

40 साल पहले होलकर परिवार के एक ट्रस्ट ने फूटी कोठी को बेच दिया था।... फूटी कोठी की पहचान उसकी खुली छत और अधूरी सीढ़ियों के कारण है

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Mar 15, 2024

इंदौर के इस फूटी कोठी को कौन नहीं जानता। कभी भूतिया मानी जाने वाली इस फूटी कोठी पर रौनक नजर आएगी। 40 साल पहले होलकर परिवार के एक ट्रस्ट ने फूटी कोठी को बेच दिया था। अब यह कोठी पुरातत्व विभाग की संपत्ति होगी। इसका नोटिफिकेशन जल्द ही जारी होगा। प्रशासन तीन साल से इस जमीन को पाने के लिए प्रयास कर रहा था।

पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री एवं विधायक उषा ठाकुर ने राजवाड़ा की कला विथिका का शुभारंभ करते हुए अधिकारियों को यह बात बताई। ऊषा ठाकुर ने कहा कि फूठी कोठी का प्रदेश सरकार के द्वारा राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने एक योजना तैयार की है जिसके अनुसार फूटी कोठी को बचाया जाएगा। पुरातत्व विभाग के संयुक्त संचालक ने बताया कि पहले प्रारूप प्रकाशित किया गया था, लेकिन उसके बाद आपत्तियों को हल किया गया है। इसके बाद गजट नोटिफिकेशन होगा। फूटी कोठी के पास फिलहाल पुखराज पैलेस मैरेज गार्डन है, लेकिन मैरेज गार्डन प्रबंधन ने इस मामले में कोई जानकारी नहीं दी है फूटी कोठी अब पुरातत्व विभाग की संपत्ति होगी।


1886 में होलकर शासन काल में फूटी कोठी का निर्माण हुआ था। महाराजा तुकोजीराव की इच्छा थी कि इस स्थान से वे अंग्रेजों की सैन्य छावनी को नजर अंदाज कर सकें और जरूरत पड़ने पर इसे हमला किया जा सके। लेकिन, अंग्रेजों को इसकी भनक लग गई और निर्माण को रोक दिया गया। फूटी कोठी की पहचान उसकी खुली छत और अधूरी सीढ़ियों के कारण है। खंडहर पड़ी इस कोठी रात में डरावनी लगने लगती है, इसलिए लोग इसे फूटी कोठी कहने लगे थे और यहां के डरावने किस्से तक बनाने लगे थे।

वहां के लोग ने तो इसे लंबे समय तक खाली देखकर उसे भूतिया कोठी कहना शुरू कर दिया था। लोगों के डर को दूर करने के लिए इस कोठी में एक मंदिर भी बनवाया गया। पिछले दस वर्षों से यह कोठी मैरेज गार्डन के रूप में उपयोग किया जा रहा था। इसे बनवाने के लिए इंग्लैंड से राज मिस्त्री आए थे, लेकिन उन्होंने अपना काम पूरा नहीं किया।

महू विधायक उषा ठाकुर ने कहा फूटी कोठी शहर की पुरातत्वी विरासत है। लोग इसे पहले देखने जाते थे, परंतु बाद में इसे किसी ने खुदाई करके खरीद लिया। इसका व्यावसायिक उपयोग होने लगा, लेकिन अब यह पुरातत्व विभाग की संपत्ति है। पिछली सरकार में, जब मैं विभाग की मंत्री थी, तब सभी नियमों का पालन किया गया था।

Updated on:
15 Mar 2024 03:30 pm
Published on:
15 Mar 2024 03:07 pm
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