Indore-Khandwa Railway Line: इस साल के रेल बजट में इस परियोजना के लिए करीब 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है...
Indore-Khandwa Railway Line: बहु प्रतीक्षित इंदौर-खंडवा रेल लाइन गेज परिवर्तन परियोजना सिंहस्थ से पहले पूरी होती नजर नहीं आ रही। रेलवे ने खुद स्वीकार किया है कि यह लाइन दिसंबर 2029 तक भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाएगी। ऐसे में सिंहस्थ से पहले उज्जैन के महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को सीधे रेल मार्ग से जोडऩे की योजना अधर में लटक गई है। रेलवे के तय टारगेट के अनुसार फिलहाल काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। दिसंबर 2029 तक बढिय़ा से कुलथानाराजपुरा तक ही ट्रैक बिछाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी पूरी लाइन के लिए यात्रियों को अभी लंबा इंतजार करना होगा।
दरअसल महू से खंडवा होते हुए अकोला तक गेज परिवर्तन का यह बड़ा प्रोजेक्ट कई सालों से चल रहा है। इसमें सबसे बड़ी बाधा वन विभाग की अनुमति रही, जो काफी समय बाद मिली,लेकिन हैरानी की बात यह है कि क्लीयरेंस मिलने के बाद भी इस हिस्से में काम शुरू नहीं हो सका है। इस साल के रेल बजट में इस परियोजना के लिए करीब 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, बावजूद इसके काम की गति उम्मीद के मुताबिक नहीं है।
परियोजना के अन्य हिस्सों में भी अलग-अलग समय सीमा तय की गई है। पातालपानी से बढिय़ा के बीच नवंबर 2027, राजपुरा से चोरल के बीच दिसंबर 2028 और बढिय़ा से कुलथाना-राजपुरा के बीच दिसंबर 2029 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्पष्ट है कि जब रेलवे खुद 2028-29 तक की समय सीमा तय कर चुका है तो सिंहस्थ से पहले इस पूरी लाइन का तैयार होना मुश्किल है। इसका सीधा असर श्रद्धालुओं और यात्रियों पर पड़ेगा, जो दोनों ज्योतिर्लिंग के बीच सीधी रेल सुविधा की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
ट्रेन रेलवे की योजना के मुताबिक सबसे पहले मुख्त्यारा से ओंकारेश्वर तक ट्रैक पूरा किया जाएगा। इसके लिए फरवरी 2027 का लक्ष्य तय किया गया है। इसके बाद चोरल से मुख्त्यारा के बीच दिसंबर 2027 तक काम पूरा करने की बात कही गई है।
इंदौर-बुदनी रेल लाइन के लिए एक और रास्ता 'साफ' हो गया। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच सरकारी जमीन से पेड़ों की कटाई की अनुमति रेलवे को मिल गई। महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट के बाद अब इंदौर-बुदनी लाइन के लिए 35 प्रजातियों के 277 पेड़ हटाए जाएंगे। डकाच्या और सांवेर में आने वाले गांव से रेलवे लाइन गुजरना है। यहां वनक्षेत्र नहीं है, लेकिन सरकारी जमीन के पेड़ हटाए जाएंगे। जिला प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को लेकर सशर्त निर्देश दिए हैं। यह अनुमति रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर दी गई है। प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई जमीन नहीं आ रही है।