
Indore Master Plan- पांच साल से इंतजार कर रहे इंदौर के लिए भी जल्द मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आने वाला है। सीएम मोहन यादव के निर्देश के बाद ड्राफ्ट लाने की गतिविधि तेज हो गई है। नगरीय प्रशासन मंत्री ने शनिवार को कहा कि भोपाल के बाद इंदौर का मास्टर प्लान भी जल्दी आएगा।
नगरीय प्रशासन मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सीएम मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) के निर्देशानुसार अति शीघ्र इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा, जिससे शहर के सुनियोजित एवं समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। इंदौर का मास्टर प्लान 2021 तक के लिए था। अब इसकी मियाद खत्म होने के बाद से मास्टर प्लान का इंतजार किया जा रहा है।
इंदौर का मास्टर प्लान पांच सालों से लंबित है। इससे शहर में अव्यवस्थित विकास हो रहा है, अवैध बसाहट भी बढ़ रही है। अब यह मास्टर प्लान ऐसे समय में आने वाला है जब इंदौर को मेट्रोपालिटिन सिटी बनाया जाना है। मेट्रो पालिटिन सिटी की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही मास्टर प्लान का इंतजार किया जा रहा है। तब कहा जा रहा था कि मास्टर प्लान लाने में दो साल लग सकते हैं, लेकिन भोपाल के मास्टर प्लान के साथ ही मंत्री के बयान के बाद अब जल्द ही इंदौर का मास्टर प्लान लाया जाएगा।
1 जनवरी 2008 को इंदौर का मास्टर प्लान-2021 लागू हुआ था। इतने सालों के लिए बना मास्टर प्लान 80 फीसदी भी लागू नहीं कर पाए। न ही पूरे सिटी फारेस्ट बन सके और न ही सभी बड़े मार्ग पूरे बन पाए। एमआर-3, एमआर 11, एमआर 12 आधे अधूरे पड़े हैं। रीजनल पार्क के अलावा स्कीम नंबर 78 और बिचौली मर्दाना में सिटी फारेस्ट बना है, जबकि दस से ज्यादा गार्डन है। 2008 के प्लान में प्रस्तावित नया ट्रेचिंग ग्राउंड भी अधर में है।
जानकार कहते हैं कि सन 1818 में होलकर महाराज ने पैट्रिक गिडीज से इंदौर का पहला मास्टर प्लान बनवाया था। इसके अनुसार राजबाड़ा और आसपास के कई इलाकों का विकास हुआ था, जो आज भी नजर आता है। जिसमें सराफा, बर्तन बाजार, क्लाथ मार्केट भी शामिल था। लेकिन, समय के साथ अब यह भी बहुत संकरे इलाकों में तब्दील हो गया है। इसके बाद का मास्टर प्लान 1975 में लाया गया था। जबकि तीसरा मास्टर प्लान 1993 में बनना था, जो नहीं बन सका था। इसके बाद 1 जनवरी 2008 का मास्टर प्लान लागू हुआ।