MP News: एमटीएच प्रबंधन के मुताबिक, मिल्क बैंक शुरू होने के बाद नवजात मृत्यु दर 25 प्रतिशत से घटकर 11 पर आ गई है।
MP News: एमपी के इंदौर शहर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमटीएच अस्पताल का मदर मिल्क बैंक देश का रोल मॉडल बन चुका है। वर्ष 2023 में खोले गए इस सेंटर से 1 हजार से अधिक नवजातों की जान बचाई गई है। सेंटर में एक हजार से अधिक महिलाओं ने करीब 210 लीटर दूध डोनेट किया है।
एमटीएच प्रबंधन के मुताबिक, मिल्क बैंक शुरू होने के बाद नवजात मृत्यु दर 25 प्रतिशत से घटकर 11 पर आ गई है। कई बार तो यह 10 प्रतिशत से कम रही। अब डिस्चार्ज रेट भी 85 प्रतिशत हो गया है। एमटीएच में प्रसूताओं के लिए करीब 150 बेड की व्यवस्था है, जिसमें नवजातों के लिए भी पर्याप्त सुविधा है। यहां स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट की क्षमता लगभग 60 बेड की है।
मालूम हो, मां का दूध बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। किन्हीं कारणों से नवजात को मां का दूध न मिले और वह कमजोर, बीमार, अनाथ या प्री टर्म हो तो उनके लिए खतरा काफी ज्यादा रहता है। इसी के चलते यह बैंक खोला गया। इसमें डोनेट किए दूध को स्टोर करना और फिर उसे संबंधित बच्चों को उपलब्ध कराने की प्रोसेस होती है।
इसके पूर्व संबंधित प्रसूता की काउंसलिंग की जाती है। एमटीएच अस्पताल में मालवा-निमाड़ और प्रदेश ही नहीं राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से आए बच्चों को जन्म से ही किसी अन्य मां का दूध मिला। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इसे स्थापित किया जा रहा है। इनके लिए इंदौर का मदर मिल्क बैंक रोल मॉडल रहेगा।
नेशनल हेल्थ मिशन ने मप्र में इंदौर को मदर मिल्क बैंक के लिए उपयुक्त माना। वर्ष 2022 में एमटीएच अस्पताल का निर्माण तो एमवायएच का गायनिक विभाग भी यहीं शिफ्ट कर दिया गया। एनएचएम और एमजीएम मेडिकल कॉलेज की मदद से कॉम्प्रिहेंसिव लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (मदर मिल्क बैंक) की शुरुआत की गई। मार्च 2023 से इसका संचालन शुरू हो गया।
एक्सपर्ट बताते है कि प्रीमैच्योर नवजातों को इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अगर इन्हें समय पर मां का दूध मिल जाए तो उनकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। कई बार बच्चा अनाथ होता है, मां की मौत हो जाती है, या किसी कारणवश दूध नहीं बनता। ऐसे में मां का दूध मिलना मुश्किल हो जाता है। इन्हीं हालातों के लिए मदर मिल्क बैंक की शुरुआत की गई, ताकि किसी दूसरी मां के पोषक दूध से भी नवजात को नया जीवन मिल सके।