- अफसरों ने किया केंपा योजना के तहत डबलचौकी के कक्ष 252 बेरछा में करीब सवा करोड़ रुपए का घोटाला, अब कोर्ट में जाएगा पूरा मामला
इंदौर@न्यूज टुडे. वन मंडल इंदौर में केम्पा योजना के अंर्तगत किए जा रहे पौधारोपण में जमकर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इंदौर वन मंडल इंदौर की सबरेंज डबलचौकी के कक्ष २५२ बेरछा में करीब सवा करोड़ रुपए का घोटाला मंडल अफसरों ने मिलकर किया। मामले में सीसीएफ की जांच में भी घोटाला सामने आ गया। इसके बाद लोकायुक्त में शिकायत के बाद जांच शुरू हो चुकी है, जिसमें लिए जा रहे बयान में तत्कालीन डीएफओ, एसडीओ, रेंजर और वन रक्षक की मिली भगत सामने आई है। जहां लोकायुक्त द्वारा मामले में प्रकरण दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। वहीं शिकायतकर्ता द्वारा अब पूरे मामले को लेकर कोर्ट में पिटिशन लगाई जा रही है, ताकि सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले अफसरों पर कार्रवाई हो सके।
उल्लेखनीय है कि एसडीओ केंपा योजना के तहत डबल चौेकी में एल्विन बर्मन के निर्देशन में ७५ हेक्टेयर में १ लाख २५ हजार पौधे लगाने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। यह काम सितम्बर २०१८ से मार्च २०१९ तक पूरा किया जाना था। लेकिन इस प्रोजेक्ट में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। इस फर्जीवाड़े को लेकर मार्च माह में ही वन मंडल इंदौर को शिकायत की गई थी मामले में अफसरों ने जांच तो करवा ली, लेकिन तत्कालीन डीएफओ और एसडीओ के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई के नाम पर दो कर्मचारियों को हटा दिया गया। जबकि कार्रवाई एसडीओ, रेंजर और वन रक्षक पर होना थी। जुलाई माह में लोकायुक्त ने शिकायत के बाद जांच शुरू कर दी थी। जिसमें मजदूर से लेकर अफसरों तक के बयान हो रहे है, जिसमें भ्रष्टाचार के नए खुलासे हो रहे हैं।
शिकायतकर्ता व एडवोकेट अभिजीत पांडे ने बताया कि विभाग के बड़े अफसर मिलकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। केंपा योजना के तहत इस प्रोजेक्ट में करीब सवा करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इसलिए अब कोर्ट में पिटिशन दायर कर रहे हैं। जिसमें एसडीओ एलविन बर्मन, रेंजर भगवान बड़ोल, वन रक्षक अमित तोमर और तत्कालीन डीएफओ महेंद्र सिसोदिया को पार्टी बनाया जा रहा है। जांच अधिकारी हेमलता शाह की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह पिटिशन लगाई जा रही है। जिसमें सभी गवाहों के बयान का शपथ पत्र लगाया जाएगा। जिससे साबित हो जाएगा जिस जगह पर मजदूरों का काम बताया गया है। उस जगह पर कभी गड्डे खोदे ही नहीं गए है। जांच के बाद जेसीबी से लगातार गड्डे खुदाई करवाई गई है। कोर्ट को यह भी बताया जाएगा कि वन अफसरों ने ही वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन कराया, जबकि यहां मशीनों से खुदाई प्रतिबंधित है।