अगले माह तक मिल जाएगी साउंड सिस्टम की सौगात
इंदौर. पर्यावरणप्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले शहर के रालामंडल अभ्यारण में अब वन्य प्राणियों से रूबरू होने के साथ ही होलकर काल का इतिहास भी जानने को मिलेगा। यहां साउंड सिस्टम लगाने का काम अंतिम दौर में है। साथ-साथ होलकर काल के अस्त्र-शस्त्र और जीवाश्म केंद्र में डायनासोर के अवशेष भी पर्यटकों को दिखाए जाएंगे।
रालामंडल को होलकरकालीन इतिहास से जोडऩे के प्रयास पांच साल से चल रहे हैं। पहाड़ी पर स्थित शिकारगाह में उस दौर के अस्त्र-शस्त्र जुटाए गए। इसे म्यूजियम का रूप देते हुए अब साउंड सिस्टम लगवाया जा रहा है। साउंड सिस्टम के जरिए वॉइस ओवर आर्टिस्ट की रिकॉर्डिंग सुनाई जाएगी, जिससे होलकर वंश का गौरवशाली इतिहास होगा। इसका मैटर तैयार करने के लिए होलकर परिवारों के साथ-साथ इतिहासकारों की भी मदद ली गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले माह तक ये म्यूजियम सामान्य पर्यटकों के लिए शुरू कर दिया जाएं।
परिवारों को लुभा रही वादियां
कोरोना काल के बाद रालामंडल आने वाले परिवारों की संख्या बढ़ती है। दरअसल, इसी अवधि में स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ी है। रालामंडल में घूमने के लिए गोल्फ कार की भी सुविधा दी जा रही हैं। इसके अलावा यहां जीवाश्म केंद्र है, जिसमें डायनोसोर के अवशेष देखे जा सकते हैं। साउंड सिस्टम के साथ म्यूजियम शुरू होने के बाद रालामंडल के प्रति और आकर्षण बढऩे की उम्मीद जताई जा रही है।
वन विभाग की डीएफओ डॉ.किरण बिसेन ने बताया कि अब रालामंडल आने वाले पर्यटकों को होलकर वंश का गौरवशाली इतिहास मधुर आवाज में जानने को मिलेगा। हमारी कोशिश है कि अगले महीने तक ही पर्यटकों के लिए ये सुविधा शुरू की जा सकें।