गांधारी ने नहीं बुलाया गजलक्ष्मी पूजा में तो अर्जुन ने स्वर्ग से बुलाया था इंद्र का ऐरावत हाथी, सुख-समृद्धि की कामना में किया महालक्ष्मी पूजन
बुंदेलखंड के सभी समाज व सिंधी समाज में होती है पूजा
इंदौर . बुधवार को बुंदेलखंडी घरों में गजलक्ष्मी व्रत का पूजन होगा। इसमें मिट्टी के हाथी पर सवार माता लक्ष्मी की पूजा होती है। घर-घर में हाथी पर सवार माता लक्ष्मी की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। घरों में विभिन्न नमकीन व मिष्ठान्न बनाए जाएंगे, जिसमें आटे के मिष्ठान्न प्रमुख होंगे और माता लक्ष्मी को अर्पित करते हैं। आटे की मिठाइयों को गुलइयां व ठठैइया कहा जाता है। माता लक्ष्मी को बेंसन के कान के आभूषण, हार, कंगन, चूडिय़ां बनाकर चढ़ाई जाती है। पं शशिभूषण शर्मा ने बताया कि व्रत प्रतिवर्ष आश्विन कृष्ण अष्टमी पर विधिवत किया जाता है। इस व्रत पर महिलाएं व्रत रखती है। कथा होती है और शाम को पूजन किया जाता है।
अर्जुन ने स्वर्ग से बुलाया था ऐरावत हाथी
इस व्रत की कक्षा के अनुसार एक समय महर्षि श्री वेदव्यासजी हस्तिनापुर गए। व्यासजी से माता कुंती तथा गांधारी ने पूछा आप हमें ऐसा सरल व्रत तथा पूजन बताएं, जिससे हमारी राज्यलक्ष्मी, सुख-संपत्ति, संतानें समृद्ध बनी रहें। व्यासजी ने महालक्ष्मी व्रत व गजलक्ष्मी व्रत के बारे में बताया। इस दिन स्नान कर 16 सूत के धागों का डोरा बनाकर, उसमें 16 गांठ लगाए, हल्दी से पीला करें, 16 दूब व 16 गेहूं डोरे को चढ़ाए। उपवास रखकर गजलक्ष्मी की स्थापना कर पूजन करें।
इस दिन गांधारी ने नगर की सभी महिलाओं को बुलाया, लेकिन कुंती को नहींबुलाया। कुंती ने इसे अपमान समझा। उनकी उदासी देख पुत्रों ने प्रश्न किया। कुंती ने कहा कि गांधारी ने मिट्टी का हाथी बनाकर उसके पूजन के लिए नगर की महिलाओं को बुलाया है। अर्जुन ने कहा कि आप भी सभी महिलाओं को बुला लें, पूजा की तैयारी करें, हमारे यहां स्वर्ग से आए ऐरावत हाथी की पूजन होगी।
शाम होते ही इंद्र ने अपना ऐरावत हाथी भेजा और सभी महिलाओं ने उसकी पूजा की। 16 गांठों वाला डोरा लक्ष्मीजी को चढ़ाया। मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया और पूजन के बाद महालक्ष्मी जी को जलाशय में विसर्जित किया। वहीं ऐरावत हाथी को इंद्रलोक भेज दिया। इस तरह इस व्रत का पूजन शुरू किया। यह व्रत अधिकांशत: बुंदेलखंड में किया जाता है।
गजलक्ष्मी व्रत....
महिलाओं ने बुधवार को गजलक्ष्मी का व्रत रखकर विधि-विधान से पूजन किया। सिंधी समाज ने पीली वस्तुएं चारों दिशा में घुमाकर सुख-समृद्धि की कामना कर महालक्ष्मी पूजन किया। वहीं बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य समाजों ने ऐरावत हाथी पर सवार गजलक्ष्मी का पूजन किया।
श्राद्ध पक्ष में आठवें श्राद्ध के दिन सिंधी समाज में महिलाओं द्वारा घर के हर सदस्य को पीला धागा, पीला प्रसाद, मीठा व्यंजन लेकर चार मुखी दीया जलाकर चारों दिशाओं में घुमाते हुए सुख-समृद्धि की कामना कर महालक्ष्मी पर्व मनाया जाता है। 16 दिवसीय महालक्ष्मी पूजन बुधवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। पूज्य लाडक़ाना पंचायत की महिला प्रतिनिधि चांदनी नरेश फुंदवानी ने बताया कि इस त्योहार में सिंधी समाज द्वारा हर परिवार में घर के सभी सदस्यों को (सगड़ा) पीला धागा पहनाकर अष्टमी पर उसे मीठी पूड़ी पर लपेटकर ब्राह्मण के यहां पूजा करके अक्खा डालकर दिया जाता है। इस दिन सतपुड़ा, सिवइयां, मीठे गच, मीठे चावल, खीर सहित आठ तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं, जिनका लक्ष्मीजी को भोग लगाकर बांटकर खाया जाता है। उन्होंने बताया कि लाडक़ाना नगर स्थित लाडक़ाना सिंधु पैलेस में पंडित इंद्रलाल शर्मा द्वारा सामूहिक महालक्ष्मी पूजन संपन्न कराया गया। समाज की महिला और पुरुषों ने 16 दिन पहले हाथ में बंधा पीला सगड़ा उतारा और घरों और मंदिरों में ऐरावत हाथी की पूजा कर मीठे व्यंजनों का भोग लगाया। पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर समाजजन ने महालक्ष्मी की कथा सुनी। सिंधी बाहुल्य कई स्थानों पर पूजा हुई। सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया महिला शाखा की अध्यक्ष सोना कस्तूरी की अध्यक्षता में साकेत नगर, मनीषपुरी, बजाज कंपाउंड में महालक्ष्मी पूजन किया गया। इस अवसर पर अंजू बजाज, चित्रा गुप्ता, हिना छाबडिय़ा सहित कई महिलाएं उपस्थित थीं। बुधवार को बुंदेलखंडी घरों में गजलक्ष्मी व्रत का पूजन हुआ। इसमें मिट्टी के हाथी पर सवार माता लक्ष्मी की पूजा की गई। घर-घर में हाथी पर सवार माता लक्ष्मी की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की गई। विभिन्न नमकीन व मिष्ठान्न बनाकर माता लक्ष्मी को अर्पित किए।