
Urban Regulations (Photo Source - Patrika)
MP News: इंदौर में अब विकास को अनुशासित और योजनाबद्ध ढांचे में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर के प्लानिंग एरिया में शामिल गांवों में अनियोजित कॉलोनियों के बढ़ते विस्तार को देखते हुए सरकार शहरी कॉलोनाइजर नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी संबंध में 8 अप्रेल को भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें कॉलोनाइजर एक्ट, रेरा, मास्टर प्लान और भवन विकास नियमों के समन्वय पर विस्तृत चर्चा होगी। शहर से लगे कई इलाकों में प्लानिंग एरिया की सीमा खत्म होते ही बिना योजना के कॉलोनियां विकसित होने लगती हैं।
इसमें उज्जैन रोड पर धरमपुरी के बाद, देवास रोड पर तलावली चांदा और मांगलिया के आगे डकाचिया व क्षिप्रा, खंडवा रोड पर बिलावली के बाद सिमरोल और महू जंक्शन तक, एयरपोर्ट के आगे हातोद क्षेत्र, धार रोड पर बेटमा और माचल क्षेत्र, सुखनिवास और हवा बंगला के आसपास के इलाके और महू रोड पर राऊ के बाद पीथमपुर (पिगडंबर) क्षेत्र शामिल है। इन क्षेत्रों में बिना प्लानिंग के कॉलोनियां काटी गई हैं। इनमें बड़ी समस्या आधारभूत सुविधाओं की कमी है। कई जगह पेयजल की व्यवस्था नहीं, सड़क और बिजली अधूरी और ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम का अभाव है।
इन इलाकों में मकान और कॉलोनियां तो शहरी स्तर की बन रही हैं, लेकिन कानूनी ढांचा अब भी ग्रामीण है। शहर में कॉलोनी विकसित करने के लिए जहां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति, रेरा पंजीयन और अन्य विभागों की एनओसी जरूरी होती है, वहीं गांवों में सिर्फ जमीन का बंटवारा और रजिस्ट्री के आधार पर प्लानिंग हो जाती है। परिणामस्वरूप कई जगह संकरी सड़कों, जलभराव और बुनियादी सुविधाओं की कमी वाली कॉलोनियां विकसित हो रही हैं।
एक ही क्षेत्र में अलग- अलग नियम लागू होने से प्रशासन, निवेशकों और खरीदारों के सामने भ्रम की स्थिति बनती है, वहीं कॉलोनाइजर इसका सीधा फायदा उठा रहे हैं। अनुमति के लिए उन्हें पैसा और समय खर्च नहीं पड़ता है, जिससे मुनाफा भी ज्यादा होता है।
बुधवार की बैठक में एक समन्वित व्यवस्था तैयार करने पर चर्चा होगी। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो बिना स्वीकृत लेआउट कोई कॉलोनी विकसित नहीं हो सकेगी, आधारभूत सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य होगा और रेरा व अन्य नियम गांवों में भी लागू होंगे। इससे कॉलोनाइजरों की मनमानी पर रोक लगेगी और लोगों को असुविधा भी नहीं होगी। अनियोजित विस्तार पर रोक लगेगी।
इंदौर औद्योगिक, आइटी, शिक्षा और रियल एस्टेट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आसपास के गांवों में भी नियोजित विकास जरूरी हो गया है। यदि समान और स्पष्ट नियम लागू होते हैं, तो शहरी विस्तार संतुलित होगा, नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, निवेश सुरक्षित और पारदर्शी बनेगा।
रिटायर्ड सिटी इंजीनियर जगदीश डगावकर का कहना है कि शहर को एक बड़े स्तर की प्लानिंग की जरूरत है। वर्तमान में कई लोग अपनी जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेच रहे हैं, बिना यह सोचे कि सड़क कहां से निकलेगी, पानी की लाइन कैसे पहुंचेगी और अन्य सुविधाएं कैसे विकसित होंगी।
इसी वजह से भविष्य में ट्रैफिक, पानी, सीवरेज और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं बढऩे की आशंका हैं। डगावकर के अनुसार, शहर के 60-70 किमी दायरे में डेवलपमेंट अथॉरिटी घोषित हो, इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान (समग्र विकास योजना) बनाई जाए, ग्राम पंचायत और नगर निकाय बने रहें, लेकिन ऊपर निगरानी तंत्र हो और कॉलोनी विकसित करने से पहले अनुमति अनिवार्य है।
Published on:
08 Apr 2026 01:56 pm
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