
Indore-Khandwa Highway प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
Indore-Khandwa Highway: इंदौर से निमाड़ (खंडवा) और आगे महाराष्ट्र-दक्षिण भारत तक कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाला एनएच-347 बीजी हाई-स्पीड कॉरिडोर अब अंतिम पड़ाव पर है। तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक 33.4 किमी लंबी फोरलेन सड़क का 86- 87 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होते ही 2 से ढाई घंटे का सफर सिमटकर महज 1 घंटे में पूरा होगा, जिससे यात्रियों को जाम और खतरनाक घाट मोड़ों से राहत मिलेगी।
इंदौर-बलवाड़ा फोरलेन केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ की आर्थिक और धार्मिक जीवनरेखा बनने जा रही है। बस तीन अड़चनें दूर होते ही यह कॉरिडोर विकास की रफ्तार को नई दिशा देगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की इंदौर के तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक की इस परियोजना का कार्य मेघा इंजीनियरिंगऔर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, यह तकनीकी चुनिंदा प्रोजेक्टों में ही इस्तेमाल हो रही है। फोरलेन सड़क के साथ टनल, घाट सुधार और बड़े ब्रिज का काम तेजी से पूर्ण हो रहा है, हालांकि तीन क्रिटिकल पॉइंट अब भी प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लगाए हुए हैं।
इंदौर से बलवाड़ा तक का सफर आगामी दिनों में यात्रियों के लिए रोमांच से भरा साबित होगा। सड़क का करीब 6 किमी हिस्सा घने जंगल से होकर गुजरेगा। जिससे यात्री सफर के दौरान प्रकृति के रोमांचक नजारों का लुत्फ ले सकेंगे। कुछ हिस्सों में 30 से 50 मीटर ऊंचे पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाया गया है।
प्रोजेक्ट में 24 ब्रिज का निर्माण किया गया है। इसमें सिमरोल क्षेत्र में 500 मीटर और 250 मीटर के दो बड़े वायाडक्ट है। जिनका निर्माण दो पहाड़ों को जोड़कर किया गया है। वहीं चोरल में 150 मीटर प्रमुख ब्रिज बनाया गया है। वहीं बलवाड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर 1.8 किमी लंबा आरओबी का निर्माण भी किया जा रहा है।
इंदौर-बलवाड़ा के बीच वर्तमान में 35 किमी. का सफर तय करने में दो से ढाई घंटे का समय लग रहा है। प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपट्र्स के अनुसार सड़क निर्माण होने के बाद इंदौर से बलवाड़ा पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगेगा। वहीं सडक़ के खतरनाक मोड खत्म होने से दूरी भी करीब ढाई किमी कम होगी।
-कॉरिडोर महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच यात्रा को सुगम बनाएगा
-सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों में ट्रैफिक प्रबंधन आसान
-निमाड़ क्षेत्र के व्यापार को गति मिलेगी
-टनल की दीवारों पर रामायण, महाभारत और धार्मिक स्थलों की चित्रकारी से सफर आध्यात्मिक अनुभव में बदलेगा।
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में 3 टनल हैं, साथ ही एक ब्रिज का भी निर्माण हो रहा है। प्रोजेक्ट का 85 प्रतिशत से ज्यादा कार्य पूर्णता की ओर है, उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक लक्ष्य अनुसार कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। कुछ कार्य शेष है, इसकी गति भी बढ़ाई जा रही है। - नागेश्वर राव, प्रोजेक्ट मैनेजर, मेघा इंजीनियरिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर
लंबाई -33.4 किमी
पूर्णता- 85% कार्य पूरा
लक्ष्य दिसंबर- 2026
समय बचत -2.5 घंटे अभी, निर्माण बाद 1 घंटा
निर्माण- 24 ब्रिज + 1.8 किमी लंबा आरओबी
Published on:
08 Apr 2026 11:39 am
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