Malnutrition In MP : सूबे के आर्थिक नगर वाले इंदौर समेत चार संभागों में ही पांच लाख से ज्यादा बच्चे प्रभावित। सिर्फ पांच साल में 3500 से 4600 मौतों का अनुमान है।
Malnutrition In MP :मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई के बीच अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल ये है कि, क्या 8 रुपए प्रतिदिन में किसी बच्चे को पोषण मिल सकता है? महंगाई के इस दौर में जब एक गिलास दूध की कीमत ही 10 से 12 रुपए है, तब सरकार कुपोषित बच्चों के लिए रोजाना मात्र 8 रुपए खर्च करके उन्हें पोषित करने का दावा कर रही है। खास बात ये है कि, 2026 में भी लागू ये दर 2017 में तय की गई थी और तब से अब तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की जा सकी है।
खास बात ये है कि, एक तरफ जहां सरकार कुपोषण मुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य पेश करती है तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी आंकड़े इस दावे को चुनौती देते नजर आते हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर संभाग में ही पिछले पांच साल के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि, इन चार बड़े क्षेत्रों में ही 5 लाख से ज्यादा बच्चे कृपोषित पाए गए हैं। इनमें एक लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में हैं। सबसे चिंताजनक पहलू मौतों का है। अनुमान के मुताबिक, इन चार संभागों में पिछले 5 साल के दौरान 3500 से 4600 बच्चों की मौतें कुपोषण से जुड़ी परिस्थितियों में हुई हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानते हैं कि वास्तविक आंकड़े इससे ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कई मामलों में मौत का कारण सीधे कुपोषण दर्ज नहीं होता।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब शहरों में पानी और स्वास्थ्य की समस्याएं भी इससे जुड़ जाती हैं। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में दूषित पानी, डायरिया और संक्रमण के मामले कुपोषण को और बढ़ा रहे हैं, यानी कुपोषण अब सिर्फ भोजन की कमी नहीं, बल्कि डबल क्राइसिस बन चुका है।
जमीनी स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई अनियमित, टेक-होम राशन की गुणवत्ता पर सवाल और मॉनिटरिंग की कमी जैसे कारण इस संकट को और गहरा कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 8 रुपए में पोषण संभव है या ये सिर्फ कागजों में चल रही योजना है?
सरकारी व्यवस्था के तहत एक कुपोषित बच्चे के लिए केंद्र और राज्य मिलाकर करीब 8 रुपए प्रतिदिन खर्च किए जाते हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम संतुलित आहार के लिए कम से कम 25 से 40 रुपए प्रतिदिन जरूरी हैं, यानी सरकारी खर्च और वास्तविक जरूरत के बीच 4 से 5 गुना का अंतर है।
जब एक बच्चे के पोषण की कीमत बाजार में 30 से 40 रुपए है, जब 8 रूपए में कुपोषण खत्म करने का दावा-नीति नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का संकेत है। मध्य प्रदेश से आगे तो केरल और तमीलनाड राज्य हैं, जहां गंभीरता के साथ 20 से 30 रुपए के करीब पोषण पर खर्च किया जा रहा है।
संभाग--- कुपोषण---- गंभीर कुपोषित----- 5 साल में अनुमानित मौतें
-इंदौर--- 1.10 लाख--- 22 हजार---- 800 से 1000
-भोपाल---1.35 लाख--- 28 हजार---- 900 से 1200
-जबलपुर--- 1.20 लाख--- 25 हजार---- 850 से 1100
-ग्वालियर--- 1.45 लाख--- 30 हजार---- 1000 से 1300
-कुल---- 5.10 लाख--- 1.05 लाख---- 3500 से 4600
राज्य---- खर्च रूपए---- स्थिति
-मध्य प्रदेश--- 8 से 10---- न्यूनतम, सीमित संसाधन
-उत्तर प्रदेश--- 8 से 10---- लीमितराज्य योगदान
-बिहार--- 8 से 9---- न्यूनतम स्तर
-राजस्थान--- 8 से 12---- आंशिक टॉप-अप
-छत्तीसगढ़--- 10 से 15---- स्थानीय सपोर्ट
-महाराष्ट्र--- 12 से 20---- शहरी क्षेत्रों में बेहतर
-तमिलनाडु--- 20 से 30---- सबसे मजबत मॉडल
-केरल--- 20 से 22---- अंडा दूध शामिल
जरूर मानक
-प्रोटीन: 15-25 ग्राम प्रतिदिन
-कैलोरी: 1000 से 1500
जमीनी हकीकत
-प्रोटीन: 8 से 10 ग्राम
-कैलोरी: 400 से 800
(यानी आधा पोषण भी नहीं मिल पा रहा)