75 से अधिक नेताओं ने अपनी पसंद के तीन-तीन नाम एक पर्ची में लिखकर पर्यवेक्षकों को सौंप दिए
इंदौर। लोकसभा प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके चलते सोमवार को इंदौर में रायशुमारी की गई। 75 से अधिक नेताओं ने अपनी पसंद के तीन-तीन नाम एक पर्ची में लिखकर पर्यवेक्षकों को सौंप दिए। अपेक्षितों की सूची में से आधे ही वोट देने पहुंचे थे।
प्रदेश भाजपा संगठन ने लोकसभा चुनाव में खड़े किए जाने वाले प्रत्याशी के नाम को तय करने से पहले जवाबदार नेता व कार्यकर्ताओं का मन जानने की कोशिश की। इसके चलते सभी लोकसभा सीटों में रायशुमारी कराई गई, जिसके चलते विधायक हेमंत खंडेलवाल व पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया को पर्यवेक्षक के रूप में इंदौर भेजा गया। सोमवार शाम 5.30 बजे दीनदयाल भवन में रायशुमारी की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले नगर भाजपा अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने बताया, पहले सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता अपना मत देंगे, बाद में देपालपुर, सांवेर, राऊ और फिर शहर की विधानसभा से आए जवाबदार वोट डालेंगे। पर्यवेक्षक ने रायशुमारी के पीछे प्रदेश संगठन की मंशा बताई।
उनका कहना था कि पार्टी में जो भी फैसला होता है वह सामूहिक निर्णय से होता है। हमारे यहां आज भी लोकतंत्र जिंदा है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के तीन नाम देने हैं। सबसे पहले सांसद और विधायकों ने दिए मत सांसद शंकर लालवानी, विधायक मालिनी गौड़, मधु वर्मा और गोलू शुक्ला ने सबसे पहले मत दिए। इनके अलावा संभागीय सह प्रभारी व विधायक तेजबहादुर सिंह, अजा वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया, गोपी नेमा, रवि रावलिया, नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, जिला कार्यकारी अध्यक्ष घनश्याम नारोलिया, सूरज कैरो ने अपना मत दिया।
नगर के करीब 18 पदाधिकारी व 21 मंडल अध्यक्ष थे तो जिले से वोट डालने वालों की संख्या कम थी। 152 अपेक्षितों में से 75 ने ही वोट डाले। इधर, विधायक महेंद्र हार्डिया बाद में पहुंचे थे, जिन्होंने फोन पर मत देने की बात कही। पर्ची लिफाफे में की बंद मालूम हो, सभी की राय आने पर पर्यवेक्षक उस पर्ची को लिफाफे में रख रहे थे। इस प्रक्रिया में करीब दो घंटे का समय लगा। आखिर में जब सभी ने अपना मत दे दिया, तब उन्होंने लिफाफा बंद कर दिया, जिसे प्रदेश भाजपा संगठन को सौंपा जाएगा।
इन्होंने नहीं दी राय
सांसद प्रत्याशी को लेकर राय देने वालों में कई प्रमुख चेहरे नदारद थे। उसमें मंत्री तुलसीराम सिलावट, कैलाश विजयवर्गीय, राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार, विधायक रमेश मेंदोला, मनोज पटेल, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सभापति मुन्नालाल यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष रीना मालवीय, जीतू जिराती और पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन का नाम भी था। बताया गया कि लगभग सभी नेता इंदौर से बाहर हैं।