8 करोड़ पर थमा कार्बन क्रेडिट का सफर, अब ग्रीन क्रेडिट पर सारा जोर
जल क्रेडिट की भी संभावनाएं तलाश रहा निगम, 12 लाख पौधों से भी आय का गणित
वर्ष 2020-21 में सीएनजी और कचरा प्लांंट से नगर निगम ने कार्बन डाइऑक्साइड पर्यावरण में आने से रोककर कार्बन क्रेडिट से करीब 8 करोड़ की कमाई की, लेकिन इसके बाद कमाई का सफर रुक गया। निगम ने अब ग्रीन क्रेडिट से आय हासिल करने की ओर कदम बढ़ाया है। इसमें भी जल क्रेडिट की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है।
शहर के पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए कार्बन क्रेडिट से आय की योजना पर काफी पहले काम शुरू हुआ था, लेकिन आगे नहीं बढ़ा। कार्बन क्रेडिट कमाने में मुख्य आधार सीएनजी प्लांट था, लेकिन उसका संचालन दूसरी कंपनी को सौंपने के साथ निगम की आय का यह स्रोत बंद हो गया। अब निगम की गाडि़यों के लिए भी यहां से सीएनजी नहीं ली जा रही है। जलूद में करीब 200 एकड़ में लग रहे सोलर प्लांट से आय की संभावना है, लेकिन अभी इसमें समय लगेगा। कार्बन क्रेडिट से डाॅलर में कमाई होती है। निगम अब सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देकर ग्रीन क्रेडिट हासिल कर सकता है। निगम ने केंद्र सरकार के ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत विभिन्न परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी कर कंपनियों को ग्रीन क्रेडिट से कमाई की संभावनाओं को तलाशने, मूल्यांकन करने के लिए आमंत्रित किया है। निगम जल क्रेडिट की संभावनाओं को भी इन कंपनियों के जरिए तलाशना चाह रहा है।
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पौधों में जीपीएस लगाएंगे, 5 साल बाद होगी आय
शहर में विशेष अभियान के तहत 12 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। अलग-अलग बगीचों में भी पौधे लगे हैं। इन सभी पौधों की गणना के साथ जीपीएस ट्रेकिंग की भी तैयारी है। अफसरों ने जानकारी निकाली तो पता चला कि पौधे लगने के करीब 5 साल बाद ग्रीन क्रेडिट से आय हो सकेगी। स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ व अपर आयुक्त दिव्यांक सिंह के मुताबिक, ग्रीन क्रेडिट के मूल्यांकन के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया है। ये कंपनियां नगर निगम की अलग-अलग परियोजनाओं का मूल्यांकन करेंगी। इसके बाद ग्रीन क्रेडिट के लिए काम होगा।