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MP News: पांच गुना बढ़े जमीन के दाम, कलेक्टर ने अधिकारियों से पूछे सवाल

MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों की रजिस्ट्री गाइडलाइन से कई गुना अधिक कीमत पर बढ़ोतरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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MP Property Price Hike

MP Property Price Hike: फोटो- एआई जनरेटेड

MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों की रजिस्ट्री गाइडलाइन से कई गुना अधिक कीमत पर होने के बाद भी गाइडलाइन में सीमित बढ़ोतरी को लेकर प्रशासन ने सवाल उठाए है। इसी मुद्दे पर जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने पंजीयन विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया।

बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जब कई स्थानों पर जमीन की रजिस्ट्री गाइडलाइन से 500 प्रतिशत तक अधिक कीमत पर हो रही है तो गाइडलाइन को केवल 150 प्रतिशत तक बढ़ाने का आधार क्या है। उन्होंने संकेत दिया कि वास्तविक बाजार दरों को देखते हुए गाइडलाइन में और अधिक बढ़ोतरी की जा सकती है।

पंजीयन विभाग ने चिन्हित किए क्षेत्र

बैठक के बाद पंजीयन विभाग ने ऐसे क्षेत्रों और कॉलोनियों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है जहां गाइडलाइन से कई गुना अधिक कीमत पर रजिस्ट्री हुई है। इन क्षेत्रों की गाइडलाइन को दोबारा रिवाइज किया जाएगा। इसके बाद संशोधित प्रस्ताव जिला स्तर पर तैयार कर केंद्रीय मूल्यांकन समिति के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नई गाइडलाइन लागू होगी।

शहरी क्षेत्र में बड़ा अंतर

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि शहरी क्षेत्र की एक शिव शक्ति नगर में 28 दस्तावेज ऐसे दर्ज हुए हैं जिनमें जमीन की रजिस्ट्री गाइडलाइन से काफी अधिक दर पर की गई। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र असरावद बुजुर्ग में भी 34 मे से 29 दस्तावेज ऐसे सामने आए, जिनमें जमीन की रजिस्ट्री गाइडलाइन से करीब 461 प्रतिशत अधिक दर पर हुई। इसके बावजूद वहां केवल करीब 150 प्रतिशत तक गाइडलाइन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था।

मार्केट रेट के करीब हो गाइडलाइन

कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि गाइडलाइन तय करते समय वास्तविक बाजार दरों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अगर गाइडलाइन और बाजार दर में बहुत ज्यादा अंतर रहेगा तो राजस्व का नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए।

जियो टैगिंग से लोकेशन साफ

बैठक में यह भी बताया गया कि अब रजिस्ट्री प्रक्रिया में जियो टैगिंग और सेटेलाइट मैपिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे जमीन की सटीक लोकेशन ट्रैस हो जाती है और यह भी पता चल जाता है कि प्लॉट खाली है या उस पर निर्माण है। अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक से स्टाम्प ड्यूटी में गड़बड़ी या चोरी की संभावना काफी कम हो जाती है।