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नई गाड़ी खरीदते समय सावधान, कोटेशन में हो रहा ‘तगड़ा खेल’, खुलासा

MP News: नियम के अनुसार इलेक्ट्रिक व्हीकल पर 4 प्रतिशत, औसतन 10 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क ही लिया जाना चाहिए।

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Major Scam

New Car Major Scam (Photo Source: AI Image)

MP News: नई गाड़ी खरीदते वक्त ग्राहक आमतौर पर डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और फेस्टिव ऑफर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन असली खेल कोटेशन के अंदर छिपा होता है। पत्रिका के 'न्यूज टुडे' की पड़ताल में सामने आया है कि शहर के 10 ऑटोमोबाइल शोरूम आरटीओ रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ग्राहकों से तय नियम से ज्यादा रकम वसूल रहे हैं। अधिकारी शिकायत की बात कह रहे हैं, लेकिन शोरूम संचालक साधे कागज पर कोटेशन दे रहे हैं, इसके चलते शिकायत का आधार ही नहीं बन रहा।

टीम ने शहर के अलग-अलग शोरूम से ईवी, बाइक और कार के कोटेशन लिए। जांच में पाया गया कि लगभग हर कोटेशन में शुल्क के नाम पर 1800 से 3000 रुपए तक अतिरिक्त जोड़े जा रहे हैं। जबकि नियम के अनुसार इलेक्ट्रिक व्हीकल पर 4 प्रतिशत, औसतन 10 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क ही लिया जाना चाहिए।

हकीकत : कार्ड ही नहीं बनता, फिर भी वसूली

हैरानी की बात यह है कि अब आरटीओ फिजिकल स्मार्ट कार्ड जारी ही नहीं करता। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट केवल ऑनलाइन पीडीएफ के रूप में दिया जाता है। इसके बावजूद शोरूम कार्ड और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसा जोड़ रहे हैं। शहर में हर साल करीब हजारों वाहन बिकते हैं। ऐसे में यदि हर ग्राहक से औसतन 2-3 हजार रुपए अतिरिक्त लिए जा रहे हैं, तो यह करोड़ों का खेल बन जाता है। जानकारों का कहना है कि यह गड़बड़ी वर्षों से चल रही है और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जिम्मेदारों का जवाब

इस मामले मे आरटीओ प्रदीप शर्मा ने बताया कि टैक्स 4 प्रतिशत ही लगता है, कोई ज्यादा ले रहा है तो उसकी शिकायत कर सकते हैं। कार्रवाई की जाएगी।

कैसे हो रही है अतिरिक्त वसूली

पड़ताल में सामने आया कि कई शोरूम मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर एक ईवी दो पहिया वाहन की कीमत 1.32 लाख रुपए पर 4 प्रतिशत के हिसाब से 5303 रुपए शुल्क बनता है, लेकिन कोटेशन में 7279 रुपए दर्ज किए गए, यानी करीब 1975 रुपए ज्यादा। इसी तरह एक बाइक के मामले में 6069 रुपए की जगह 9019 रुपए और एक कार में करीब 2375 रुपए अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।

इस पर भी सबसे बड़ा खेल यह है कि कोटेशन साधारण कागज पर दिया जाता है ऐसे में अगर कोई शिकायत करना चाहे भी तो वह कर नहीं सकता। जब इस अंतर पर सवाल किया गया तो शोरूम के सेल्स एग्जीक्यूटिव ने अलग-अलग तर्क दिए। किसी ने इसे 'फाइल पास कराने का खर्च' बताया, तो किसी ने 'कार्ड और प्रोसेसिंग फीस' का हवाला दिया।