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नीला ड्रम कांड: पत्नी पर शक, बेटी बनी शिकार… पिता ने गला घोंट नीले ड्रम में छिपाई लाश, अब हुआ फैसला

MP News: पत्नी के चरित्र पर शंका के चलते बेटी की गला घोंटकर हत्या के बाद लाश को नीले ड्रम में भरकर रखने वाले पिता बबलेश अहीरवार मूल निवासी देहरी गुना को जिला न्यायालय ने सजा सुनाई है।

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mp news Father who killed his daughter

MP news Father who killed his daughter नीला ड्रम कांड (source: ai image)

MP News: पत्नी के चरित्र पर शंका के चलते बेटी की गला घोंटकर हत्या के बाद लाश को नीले ड्रम में भरकर रखने वाले पिता बबलेश अहीरवार मूल निवासी देहरी गुना को जिला न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इंदौर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने बुधवार को 2018 में हुए हत्या, हत्या के प्रयास की धाराओं में सजा सुनाई। बेटी के बाद हत्यारे ने पहले पत्नी को मारने की कोशिश की, जब असफल रहा था तो जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था।

पिता ने गमछे से घोंटा गला और लाश ड्रम में भरकर रख दी

अपर लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने बताया, मामले में मुख्य रूप से बबलेश की पत्नी और उसके बेटे सहित सास-ससुर और अन्य गवाहों के बयान हुए थे। एमवायएच में तहसीलदार द्वारा लिए गए बयान में उसने पत्नी पर चरित्र शंका के साथ बेटी पर उसकी मदद करने के कारण हत्या की बात कही थी। वह जब घर पहुंचा तो बेटी सो रही थी, जिसका गमछे से गला घोंटा और लाश ड्रम में भरकर रख दी। इसको मुख्य आधार बनाया गया।

आजीवन कारावास की सजा

दूसरी ओर कोर्ट में पिता की ओर से कहा गया कि बेटी के अन्य व्यक्ति से संबंध थे, उसने ही उसे मारा है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यदि बेटी के किसी व्यक्ति से संबंध को परिवार पसंद नहीं करता तो निश्चित ही परिवार पहले उस पर शंका जाहिर करता और उसे आरोपी बनाने का प्रयास करता। न की अपने परिजन को फंसाता। कोर्ट ने बेटी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और 500 रुपए के अर्थदंड के साथ साक्ष्य मिटाने के लिए 3 साल और 500 रुपए के अर्थदंड के साथ ही हत्या के प्रयास में 5 साल और 500 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

यह है मामला

घटना 27 नवंबर 2018 की है। सुदामाबाई ने परदेशीपुरा थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी कि वह परिवार सहित कुछ समय पहले इंदौर आए थे। यहां फिरोज गांधी नगर में किराए के घर में रहकर मजदूरी कर रहे थे। पति बबलेश, पुत्री रानी और बेटा अंकेश साथ रहता था। 27 नवंबर को रात 8.30 बजे वह घर आई तो पति घर पर था। बेटी रानी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह इलाज कराने गई है।

नीले ड्रम में मिली बेटी की लाश

जब शंका होने पर विरोध जताया तो बबलेश ने कमरे का दरवाजा लगाकर कुल्हाड़ी से सिर पर वार किया। पहले से दो गिलास में रखा जहर पिलाने की कोशिश की। इसके बाद उसने खुद जहर पी लिया और डिब्बी में रखी सल्फास की गोली खा ली। इसी बीच बेटा आ गया। एमवायएच में बेटी के बारे में पूछा तो उसने बताया था कि उसने रानी को मारकर ड्रम में डाल दिया है और ऊपर कपड़े का बिस्तर रखकर छुपा दिया है। लाश के गले में गमछा बंधा हुआ था।