इंदौर

‘एक्ट को उपन्यास की तरह न पढ़ें, हर कॉमा, पैराग्राफ का होता है महत्व’

‘एक्ट को उपन्यास की तरह न पढ़ें, हर कॉमा, पैराग्राफ का होता है महत्व’

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Jun 30, 2018
‘एक्ट को उपन्यास की तरह न पढ़ें, हर कॉमा, पैराग्राफ का होता है महत्व’

सीए स्टूडेंट्स नेशनल कॉन्फ्रेंस अविराम में शामिल हुए एक हजार से अधिक स्टूडेंट्स, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए
इंदौर. द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की बोर्ड ऑफ स्टडीज और इंदौर सीए शाखा की दो दिवसीय सीए स्टूडेंट्स नेशनल कॉन्फ्रेंस अविराम की शुरुआत शुक्रवार को हुई। सीए भवन में हो रही कॉन्फ्रेंस में एक हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स भाग ले रहे हैं। पहले दिन 16 स्टूडेंटस ने डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि देवी अहिल्या विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ नरेंद्र धाकड़ और विशेष अतिथि टेक्निकल एजुकेशन डायरेक्टर बी. लक्ष्मीनारायण थे। डॉ. धाकड़ ने कहा, हमें अपनी भाषा की सीमा को पार करना होगा तथा स्टूडेंट्स को कम से कम चार भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए। टेक्निकल एजुकेशन डायरेक्टर बी. लक्ष्मीनारायण ने कहा, किताबी ज्ञान के साथ-साथ कौशल विकास पर भी ध्यान देने की जरूरत है। पहले टेक्निकल सेशन की अध्यक्षता करते हुए लेखक व सीए डॉ. गिरीश आहूजा ने कहा, किसी भी एक्ट को उपन्यास की तरह नहीं पढऩा चाहिए। हर एक कॉमा, सेमीकॉलन व पैराग्राफ का अपना एक अलग महत्व होता है। इनका ध्यान नहीं रखा गया तो अर्थ का अनर्थ हो सकता है।
रिसर्च पेपर पेश किए
पेपर प्रजेंटर स्टूडेंट ख्याति गुप्ता ने डायरेक्ट टैक्स के गिफ्ट सेक्शन 56 व अनुमानित इनकम सेक्शन ४४ आदि मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बताया, छोटे उद्यमियों और व्यापारियों के लिए सकल नकद प्राप्तियों का ८ फीसदी और चेक से प्राप्तियों का ६ फीसदी अगर विवरणी में दिखलाया गया हो तो बुक्स, वाउचर आदि रखना आवश्यक नहीं है। इससे छोटे व्यापारियों को सुगमता होती है। इंदौर सीए शाखा चेयरमैन सीए अभय शर्मा ने बताया, स्टूडेंट्स में रिसर्च की प्रवृत्ति को बढ़ाना और सब्जेक्ट्स का ज्यादा से ज्यादा एनालिसिस करना होगा। सिकासा चेयरमैन कीर्ति जोशी, असीम त्रिवेदी, मनोज फड़निस, पंकज शाह, नीलेश गुप्ता, चर्चिल जैन, गर्जना राठौर, आंनद जैन आदि मौजूद थे।

Published on:
30 Jun 2018 06:24 pm
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