
Indore News :मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के अंतर्गत आने वाले डॉ. आंबेडकर नगर (महू) बारिश से धुली पहाडियां… घाटियों में उतरती धुंध… चट्टानों से गिरते झरने… जंगलों के बीच से निकलती पटरी और हर मोड़ पर बदलता नजारा। शनिवार यानी आज से पातालपानी - कालाकुंड का ये रोमांचक दृश्य एक बार फिर जीवंत हो गया है। 155 साल पुराने ऐतिहासिक रेलखंड पर इस सीजन की पहली हेरिटेज ट्रेन शनिवार से दौड़ना शुरु हो गई है।
पश्चिम रेलवे ने शुक्रवार को ट्रेन संचालन की मंजूरी दे दी थी। सप्ताह में तीन दिन चलने वाली ये ट्रेन पर्यटकों को करीब 9.5 किलोमीटर के सफर में प्रकृति, रोमांच और रेलवे विरासत का अनुभव कराएगी।
पश्चिम रेलवे के अनुसार, ट्रेन नंबर 52965 पातालपानी से सुबह 11.05 बजे रवाना होकर दोपहर 1.05 बजे कालाकुंड पहुंची। वापसी में ट्रेन नंबर 52966 कालाकुंड से दोपहर 3.34 बजे रवाना होकर शाम 4.30 बजे पातालपानी पहुंचेगी। यानी करीब दो घंटे का ये सफर रास्ते के रोमांच के लिए यादगार साबित होगा।
ट्रेन शुक्रवार, शनिवार और रविवार को संचालित की जाएगी। हेरिटेज ट्रेन से आने और जाने के लिए यात्रियों को अलग - अलग टिकट लेना होगा। एक दिशा के सफर के लिए एसी चेयरकार का किराया 265 रुपए, जबकि नॉन-एसी चेयरकार का किराया मात्र 20 रुपए प्रति यात्री रहने वाला है।
पातालपानी से कालाकुंड के बीच करीब 9.5 किमी लंबा मीटरगेज रेलखंड पहाड़ियों, घने जंगल और घाटियों से गुजरता है। मार्ग पर चार सुरंगें, 24 तीखे मोड़ और 41 पुल हैं। मानसून में झरनों, हरियाली और बादलों से ढकी घाटियों के बीच ट्रेन का सफर खास आकर्षण रहता है।
रेलवे अधिकारियों की मानें तो हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना आगे बढ़ने के बाद ये ट्रेन संभव है कि, अपने मौजूदा स्वरूप में अंतिम बार संचालित हो रही है। भविष्य में ट्रैक के आधुनिकीकरण के साथ पर्यटकों को विस्टाडोम कोच, संभावित ओपन कोच और अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस नई हेरिटेज ट्रेन का अनुभव देने की योजना के तहत सैलानियों के लिए शुरु की जाएगी।
लंबे समय रहा प्रकृति प्रेमी पर्यटकों का इंतजार आज खत्म हो गया है। लंबे समय तक पातालपानी और कालाकुंड पहुंचने वाले पर्यटक हेरिटेज ट्रेन की जानकारी लेते नजर आते रहते थे। स्टेशन और पर्यटन स्थलों पर सबसे अधिक पूछा जाने वाला सवाल यही था कि, आखिर ट्रेन शुरु कब से होगी। मानसून के दौरान ये ट्रेन विंध्याचल की पर्वतमालाओं, घने जंगलों, गहरी घाटियों, ऊंचे पुलों और सुरंगों के बीच से गुजरते हुए ऐसा रोमांचक अनुभव कराती है जो प्रदेश में कहीं और देखने को नहीं मिल पाता। यही वजह है कि, हर साल यहां हजारों पर्यटक विशेष रूप से इस अद्भुत सफर का आनंद लेने आते हैं।