राजा दीनदयाल के फोटोग्राफ्स की लालबाग में बनी स्थायी गैलरी, इंदौर से ही शुरू किया था कॅरियर, आज होगी शुरुआत
इंदौर. देश के पहले फोटोग्राफर राजा दीनदयाल द्वारा खींची गई दुर्लभ फोटोग्राफ्स की परमानेंट गैलरी लालबाग पैलेस में तैयार हो चुकी है। इसकी शुरुआत शुक्रवार से होगी। १९वीं सदी के विख्यात फोटोग्राफर रहे राजा दीनदयाल से फोटो खिंचवाने के लिए राजाओं को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने नवाबों, हीरे-जवारातों से लदे राजा-महाराजाओं, बाघ-चीतल के शव पर पैर रख फोटो खिंचवाते अंग्रेज अफसरों, महल, हवेलियों सहित कई ऐतिहासिक दृश्य अपने कैमरे में कैद किए। इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आट्र्स (आइजीएनसीए) की इस प्रदर्शनी में इंदौर से जुड़ी फोटोग्राफ्स को ही शामिल किया गया है। उनकी फोटोज राजा-महाराजाओं की लाइफ स्टाइल, फैशन, गहने, फर्नीचर आदि को विजुअलाइज करती हैं। उनके सबसे बड़े फैन छठे निजाम महबूब अली ने तो उनके बारे में शेर लिखा था- अजब ये करते हैं कमाल कमाल।
55 फोटोग्राफ्स करेंगे प्रदर्शित
हैदराबाद के निजाम ने उन्हें राजा का टाइटल दिया। आइजीएनसीए में पुस्तकालय व सूचना विभाग के निदेशक डॉ. रमेशचंद्र गौड़ ने बताया, परमनेंट गैलरी की शुरुआत शुक्रवार शाम 5 बजे होगी। मुख्य अतिथि लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन रहेंगी। मप्र शासन के संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा, आइजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और मप्र शासन पुरातत्व, अभिलेखागार व संग्रहालय आयुक्त अनुपम राजन विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। प्रदर्शनी में इंदौर और प्रदेश के विभिन्न प्रांतों के राजाओं की शाही सवारी, राजा और रानियों के पोट्रेट, ऐतिहासिक भवनों और स्मारकों, नर्मदा नदी आदि के 55 फोटोग्राफ्स को प्रदर्शित किया जाएगा।
इंदौर से नौकरी छोड़ शुरू किया स्टूडियो
1844 में जन्मे राजा लाला दीनदयाल थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग (आइआइटी रूडक़ी) से पासआउट थे। 1866 में इंदौर में पीडब्ल्यूडी में ड्राफ्ट्समैन से अपने कॅरियर की शुरुआत की। लेकिन फोटोग्राफी के शौक के चलते उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। इंदौर स्टेट के महाराजा तुकोजीराव द्वितीय की मदद से इंदौर में पहला फोटो स्टूडियो खोला, जिसका नाम रखा लाला दीनदयाल एंड संस। 1870 तक उन्होंने इंदौर सहित मुंबई, सिकंदराबाद में भी अपना स्टूडियो खोल लिया।
ग्लास प्लेट तकनीक से लेते थे फोटोज
एग्जिबिशन से जुड़े अफसरों के मुताबिक नौकरी के दौरान ही दीनदयाल ग्लास प्लेट तकनीक से फोटो लेने लगे थे। जब ये तकनीक भारत में नई थी। लेकिन इसके बावजूद उनका एंगल, तकनीक, लाइट का उपयोग आज के फोटोग्राफर्स को चुनौती देती है। इसके बाद उन्होंने एक बड़ा सा कैमरा ख्ररीदा, जिसके आगे लैंस लगा होता था। उसे जरूरत के हिसाब से बदलना पड़ता। फोकस कंट्रोल करने के लिए नीचे बने हैंडल को आगे-पीछे घुमाया जाता था।