
Asaram : नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा आसाराम इस समय जेल से बाहर है। उसे 20 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया है। आसाराम को 13 साल पहले इंदौर के आश्रम से गिरफ़्तार किया गया था। तब पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे पकड़ा था। राजस्थान पुलिस के तत्कालीन डीसीपी आईपीएस अजय पाल लांबा ने आसाराम मामले में एक किताब लिखी है। 'गनिंग फ़ॉर द गॉडमैन, द ट्रू स्टोरी बिहाइंड द आसाराम बापूज़ कन्विक्शन' नामक इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि आसाराम को गिरफ़्तार करना बहुत मुश्किल था। तब हमने उसके ही जाल में उलझाने की चाल चली। पुलिस का यह दांव सही साबित हुआ।
जैसे ही आसाराम पर केस दर्ज हुआ, राजस्थान पुलिस उसकी गिरफ़्तारी की तैयारी में जुट गई। इसके लिए 30 अगस्त 2013 को जोधपुर की पुलिस टीम इंदौर रवाना हो गई। इधर जोधपुर के डीसीपी अजय पाल लांबा ने शाम को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुलाई जिसमें बताया कि हमारी टीम आसाराम को गिरफ़्तार करने जा चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से यह बात भी कही कि पुलिस जानती है कि आसाराम कहां है!
हकीकत यह थी राजस्थान पुलिस को आरोपी की लोकेशन के बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा था। ऐसे में पुलिस ने आसाराम को उलझाने के लिए यह दांव चला था। बाबा इसमें उलझ भी गया। आसाराम बचने के लिए भोपाल के एयरपोर्ट पर पहुंच गया। पुलिस ने यह सूचना भी लीक कर दी जिससे एयरपोर्ट पर मीडिया को जमावड़ा हो गया। कैमरों की नज़रों से खुद को छिपाने के लिए आसाराम को मजबूरन इंदौर आश्रम के लिए निकलना पड़ा। वहां पुलिस उसकी ताक में ही बैठी थी, बाबा को यह भनक नहीं लग सकी। एडिशनल डीसीपी सतीश चंद्र जांगिड़ के नेतृत्व में गई जोधपुर पुलिस ने आसाराम को गिरफ़्तार कर लिया।
आईपीएस अजय लांबा ने अपनी पुस्तक में इस घटना का जिक्र कर कहा कि वे उस दिन दरअसल अंधेरे में तीर चला रहे थे। पुलिस के पास बाबा के संबंध में कोई पक्की सूचना नहीं थी पर वह खुद जाल में फंसते गया।