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Indore Metro: टिकट के अलावा ब्रांडिंग से कमाई करेगी मेट्रो, 17 स्टेशनों के लिए मांगी बोलियां

Indore Metro: इंदौर मेट्रो के 17 स्टेशनों पर सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग अधिकार कंपनियों को देने की योजना बना रही है। नवंबर में टेंडर खुलेंगे, जिससे गैर-किराया राजस्व बढ़ेगा और ब्रांड प्रचार का मौका मिलेगा।
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मेट्रो ट्रेन (Photo Source - Patrika)

मेट्रो ट्रेन (Photo Source - Patrika)

Indore News: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में मेट्रो अब टिकटों से होने वाली कमाई के अलावा स्टेशनों के जरिए भी राजस्व बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) शहर के 17 स्टेशनों पर कंपनियों को सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग के विशेष अधिकार देने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत स्टेशन के मूल नाम के साथ किसी कंपनी या ब्रांड का नाम जोड़ा जा सकेगा। इसके लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं और नवंबर में टेंडर खोले जाने की तैयारी है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनियों को अधिकार आबंटित किए जाएंगे।

इंदौर में गांधीनगर से मालवीय नगर तक के कॉरिडोर के स्टेशन इस योजना के दायरे में आएंगे। इनमें सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के स्टेशन भी शामिल हो सकते हैं। सेमी-नेमिंग व्यवस्था में स्टेशन का मूल नाम बरकरार रहेगा, लेकिन उसके साथ संबंधित कंपनी या ब्रांड का नाम जुड़ जाएगा। इससे यात्रियों को स्टेशन की पहचान के साथ ब्रांड का नाम भी दिखाई देगा। वहीं को-ब्रांडिंग के तहत कंपनियों को स्टेशन परिसर में निर्धारित स्थानों और माध्यमों से अपने ब्रांड का प्रचार करने का अवसर मिल सकेगा। इसके लिए मेट्रो कॉर्पोरेशन की ओर से तय शर्तों और नियमों का पालन करना होगा।

बोली के आधार पर होगा आबंटन

इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार इच्छुक कंपनियों के बीच प्रीबिड बैठक भी हो चुकी है। अब नवंबर में प्राप्त प्रस्ताव खोले जाएंगे। इसके बाद तय शर्तों के अनुसार चयनित कंपनियों को संबंधित स्टेशनों के लिए अधिकार दिए जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रति स्टेशन बेस प्राइस करीब 60 हजार रुपए रखा गया है।

कंपनियों को भी मिलेगा प्रचार का मौका

मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिदिन आने-जाने वाले यात्रियों के बीच ब्रांड की पहचान बढ़ाने के लिए कंपनियां इस व्यवस्था में रुचि ले सकती हैं। वहीं मेट्रो को विज्ञापन और ब्रांडिंग के माध्यम से गैर-किराया राजस्व जुटाने का अवसर मिलेगा। इससे टिकट बिक्री पर निर्भरता कम करने और संचालन से जुड़ी आय के दूसरे स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।