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दुकानों के बाहर ‘3 फीट’ से बड़े बोर्ड लगाने के लिए नया नियम, इंदौर में सख्ती की तैयारी

Municipal council: नगर निगम आउटडोर मीडिया पॉलिसी के तहत 3 फीट से बड़े साइनबोर्ड के लिए ऑनलाइन अनुमति प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे बाजारों में एकरूपता आएगी और निगम को विज्ञापन कर के रूप में राजस्व मिलेगा।
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दुकानों के बाहर साइन बोर्ड , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

दुकानों के बाहर साइन बोर्ड , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Indore news:मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में आउटडोर मीडिया पॉलिसी के तहत दुकानों के बाहर लगने वाले 3 फीट से अधिक बड़े बोर्ड की अनुमति के लिए नगर निगम ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य है कि निगम को राजस्व मिले और बाजारों में दुकानों के बाहर एकरूपता आ सके। मालूम हो, प्रमुख बाजारों और गली-मोहल्लों में दुकानों के बाहर बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगे हैं। इनसे कई नामी उत्पादों की ब्रांडिंग की जा रही है। निगम को इससे हर महीने आर्थिक नुकसान हो रहा है।

हाल ही में जगह-जगह लगे होर्डिंग और बेतरतीब बोर्ड पर अंकुश लगाने के लिए कुछ मार्केट में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया था। समान निर्माण करने के अभियान का असर जिला कोर्ट के बाहर, गंगवाल और कुछ अन्य बाजारों में दिखा, लेकिन विरोध होने से यह फॉर्मूला आगे नहीं बढ़ सका। इससे दुकानदार जमक ब्रांडिंग कर निगम को राजस्व की चपत लगा रहे हैं।

यह है आउटडोर मीडिया पॉलिसी

आउटडोर मीडिया पॉलिसी के मुताबिक, यदि किसी दुकान के बाहर लगे कमर्शियल या साइन बोर्ड की चौड़ाई 3 फीट से अधिक है, तो वह विज्ञापन कर (एडवर्टाइजमेंट टैक्स) के दायरे में आता है। अगर दुकानदार बोर्ड पर किसी अन्य कंपनी या ब्रांड का प्रचार (ब्रांडिंग) करता है, तो उससे भी विज्ञापन शुल्क वसूला जाना तय है। अब ऑनलाइन एप्लाई के बाद एक टीम निरीक्षण करेगी और उसके आधार पर शुल्क तय होगा। फिर अनुमति दी जाएगी।

बड़े पैमाने पर उल्लंघन

राजबाड़ा, एमजी रोड, पलासिया, अन्नपूर्णा रोड, विजय नगर सहित कई प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में 80 फीसदी से अधिक दुकानों पर आउटडोर मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन हो रहा है। निगम आर्थिक तंगी से जूझ रहा हैतो वहीं राजस्व विभाग को दुकानों, शोरूम आदि से आर्थिक चपत लग रही है। हालांकि अभी तय नहीं है कि नई नीति कब से लागू होगी, क्योंकि कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारी ही नहीं, कुछ जनप्रतिनिधि भी विरोध में आ जाते हैं।