
Sonam Bail Supreme Court Hearing- देशभर में चर्चित मध्य प्रदेश के इंदौर के निवासी राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर मिस्ट्री (Raja Raghuvanshi Murder Case) में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी (Sonam Raghuvanshi) ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दायर कर खुद को बेकसूर बताया है। सोनम ने दावा किया है कि उसे झूठे आरोपों में फंसाया गया है और वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला 14 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रखा है। अब सुनवाई खत्म होने के बाद राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी का बयान सामने आया है।
दरअसल पिछली सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मामले में अभी 94 गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं और प्रकरण ट्रायल स्टेज में है। अदालत ने मामले की प्रगति को लेकर कई सवाल उठाए थे और अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख तय की थी। अब सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ दायर मेघालय सरकार की याचिका पर अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विचारणीय मुद्दा है।
इधर, सोनम के हलफनामे पर प्रतिक्रिया देते हुए राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने उसे पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया। उन्होंने कहा कि यदि सोनम निर्दोष होती तो वह राजा को आगाह कर सकती थी कि राज कुशवाहा और उसके साथी उसके पीछे-पीछे आ रहे हैं। उमा रघुवंशी ने कहा कि उनका बेटा आरोपियों को पहचानता तक नहीं था, इसलिए सोनम का खुद को बेकसूर बताना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि सोनम को राजा को रास्ते से हटाना था इसलिए उसने इतनी बड़ी साजिश रची। इसके साथ ही उन्होंने पुणे का केतन अग्रवाल हत्याकांड का उदाहरण देते हुए बताएं कि सोनम जैसी लड़कियों से ही प्रेरित होकर सिया ने केतन की हत्या करी है। इसके साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर भी आपत्ति जताई है।
इससे पहले मामले में आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताया था। सोनम ने साफ तौर पर दावा किया है कि वे पूरी तरह से बेकसूर हैं और उन्हें इस केस में झूठा फंसाया गया है। अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर है। इसे कोर्ट में संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है। सिर्फ आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता है, ऐसे में कोर्ट के पास उसकी जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है। वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है।