इंदौर

चतुष्पीठ शंकराचार्य अच्युतानंद को स्वरूपानंद सरस्वती ने बताया फर्जी

बिना पहचाने साधु-संतों को न दें महत्व: शंकराचार्य

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Sep 14, 2017
shankracharya swarupanand sarswati

इंदौर. राजनीति सत्तारूढ़ होकर नहीं सेवा भाव से करना चाहिए। अमान्य साधु-संतों और बाबाओं को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए, अन्यथा राम रहीम जैसे लोग संतों को कलंकित करते हैं। साधु-संतों को बगैर पहचाने महत्व नहीं देना चाहिए।

परंपराओं को नहीं मानने वाले साधु-संत नहीं, पाखंडी होते हैं

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने उक्त बातें बुधवार को नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ पर चर्चा के दौरान कहीं। उन्होंने सिरसा के डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम के चरित्र व लोगों को विश्वास को ठेस पहुंचाने को लेकर कहा कि ऐसे लोग धन-बल के प्रचार से स्वयं को स्थापित कर जनता को भ्रमित करते हैं। वेदशास्त्र, परंपराओं को नहीं मानने वाले साधु-संत नहीं, पाखंडी होते हैं। ऐसे कई संत शहर में घूम रहे हैं। इनको बगैर पहचाने महत्व नहीं देना चाहिए।

चौथे मठ के शंकराचार्य होने का दावा कर रहे हैं

उन्होंने चौथे मठ शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य अच्युतानंद को फर्जी व निरक्षर कहा है। उन्होंने कहा कि अच्युतानंद ने कुछ संतों को बुलाकर भूमा आश्रम हरिद्वार में भगवान शिव के अभिषेक का कहकर खुद का अभिषेक करवा लिया। अब चौथे मठ के शंकराचार्य होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे संतों का हम भी विरोध करते हैं। इस अवसर पर मठ के डॉ. गिरीशानंद ब्रह्मचारी सहित भक्तों ने पादपूजन किया। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती बुधवार सुबह 6.30 बजे निजी बस से द्वारका से इंदौर पहुंचे। वे नैनोद स्थित मठ में दो दिन रुकेंगे। उन्होंने शाम ६ बजे आधा घंटे लोगों को दर्शन दिए।

कलश लेकर कन्याओं ने अभिनंदन किया

गुरुवार सुबह 7 बजे से एक घंटा और दोपहर में 2 बजे दर्शन देंगे। दोपहर में दीक्षा देकर भोपाल के लिए रवाना होंगे। शंकराचार्य के आगमन पर मनोज चौधरी, शैलेंद्र वर्मा आदि ने स्वागत किया। ढोल-ढमाके के साथ उन्हें मंच पर लाए। कलश लेकर कन्याओं ने अभिनंदन किया। विधायक मनोज पटेल, रामस्वरूप गेहलोत, पुरुषोत्तम धाकड़ आदि ने आशीर्वाद लिया।

Published on:
14 Sept 2017 12:55 pm
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