इंदौर

बड़ा बदलावः राजपूतों में बिना दहेज विवाह कर पेश कर रहे हैं मिशाल

दहेज कुप्रथा से समाज की जंग, दहेज मुक्त शादी की मुहिम में अब तक हुए 50 विवाह

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Apr 19, 2022
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इंदौर@ मनीष यादव .
शादी में अगर किसी बात की चर्चा रहती है तो वह है दहेज। लड़की कितना दहेज लेकर आई, बरातियों को क्या दिया। यह सब समाज में प्रतिष्ठा का विषय बन जाता है। इसके कारण कई बार रिश्तों में खटास आ जाती है। विवाह तक टूट जाते हैं। इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए राजपूत समाज में दहेज मुक्त विवाह मुहिम शुरू की गई है। इसी का नतीजा है कि अब तक 50 जोड़ों की शादी बिना दहेज हो चुकी है।

ऐसे हुई शुरुआत
जय राजपुताना संघ के हितेंद्रसिंह चौहान ने बताया कि इस मुहिम की शुरुआत संघ के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह की प्रेरणा से हुई है। समाज में दहेज प्रथा घर कर चुकी है। राजस्थान में तो किसान परिवार को बेटी की शादी में जमीन तक बेचना पड़ती थी। इसके चलते कुछ लोग बेटियों को बोझ तक मानने लगे हैं। इसके चलते इस मुहिम की शुरुआत की गई। समाज के कार्यक्रमों में अपील की गई कि दहेज नहीं लें। जो लड़की आप के घर आ रही है, वह क्षत्राणी खुद मां भवानी का रूप है। इस अपील का असर देखने को मिला।

अपनी शादी की , दूसरों के लिए बने मिसाल
इस मुहिम की शुरुआत चार वर्ष पूर्व हितेंद्रसिंह ने अपनी शादी से की। अपनी शादी में दहेज न लेकर मिसाल पेश की और दूसरों को भी प्रेरित करना शुरू कर दिया। अब तक 50 जोड़ों की शादी हो चुकी हैं। सभी शादियों में खास बात यह रही कि किसी भी परिवार को समझाना नहीं पड़ा। वह अपने आप ही इस मुहिम का हिस्सा बनते चले गए।
लड़कीवालों ने पूछा, साफ किया इंकार
17 अप्रैल को छोटा बांगड़दा के दीपकसिंह चौहान की बिना दहेज की शादी हुई। उनकी बरात घाटा बिल्लोद के पास गांव में गई थी। उनके बड़े भाई मोहित सिंह राजपुताना संघ के सक्रिय सदस्य हैं। वे दहेज प्रथा के खिलाफ हैं। शादी पक्की हुई तो लड़की वालों ने उनसे दहेज को लेकर बात की। इस पर दीपक के परिवार ने साफ-साफ कह दिया कि वह बिना किसी दहेज के शादी करेंगे। शादी के दौरान किसी भी प्रकार का लेनदेन नहीं होगा। लड़की का परिवार भी तैयार हो गया।

Published on:
19 Apr 2022 11:54 am