
इटारसी। टीबी की बीमारी का उपचार सरकारी अस्पतालों से किया जाना है। निजी अस्पतालों को उनके यहां आने वाले टीबी मरीजों की जानकारी सरकारी अस्पताल भिजवानी है मगर इस नियम का पालन इटारसी में होते नहीं दिख रहा है। शहर के एकाध निजी अस्पताल को छोड़ दें तो कोई भी निजी अस्पताल टीबी मरीजों की डिटेल नहीं भेज रहा है। इससे दो बातें सामने आ रही हैं या तो शहर में टीबी मरीज ही नहीं बचे हैं या फिर निजी अस्पतालों में नियम विरुद्ध टीबी मरीजों का ट्रीटमेंट हो रहा है। दो साल में क्षय रोग विभाग तक शहर के एक निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य का रिकार्ड नहीं भेजना कुछ ऐसे ही संकेत दे रहा है।
वर्ष २०१२ में टीबी बनी नोटिफाइड डिसीज
टीबी की बीमारी से देश में होने वाली मौतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में इसे नोटिफाइड डिसीज घोषित किया था। इस नोटिफिकेशन के बाद यह तय हो गया था कि टीबी के मरीज सामने आने पर उनका उपचार सरकारी अस्पतालों से होगा। निजी चिकित्सक अपने क्लिनिकों में उनका उपचार नहीं करेंगे। यदि कोई मरीज निजी क्लिनिक पहुंचता भी है तो उसे सरकारी अस्पताल रेफर करना होगा या फिर निश्चय सॉफ्टवेयर में उसक जानकारी दर्ज करना होगी।
यह है हकीकत
वर्ष 2012 में टीबी के नोटिफाइड होने के बावजूद इसके लिए तय नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। वर्ष 2014 से क्षय रोग विभाग को शहर का एकाध निजी अस्पताल ही टीबी के मरीजों की जानकारी भेज रहा है। अन्य अस्पतालों से यह जानकारी नहीं भेजी जा रही है। टीबी मरीज की दवा मेडिकल स्टोर्स पर भी नहीं बिकना चाहिए मगर निगरानी नहीं होने से टीबी की दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं। मेडिकल स्टोर्स पर दवाएं मिलना साबित करता है कि शहर के कई निजी अस्पताल टीबी मरीजों को ट्रीटमेंट दे रहे हैं मगर उसकी जानकारी क्षय विभाग तक नहीं पहुंचा रहे हैं।
एक नजर में खास बातें
सरकारी अस्पताल में प्रतिमाह निकलने वाले मरीज- करीब २५ से 30
वर्ष 2014 से 2018 तक निश्चय सॉफ्टवेअर में दर्ज मरीज- करीब 2000
टीबी मरीज को दिया जाने वाला उपचार- डॉट पद्धति
लेटर भेजेंगे
शहर के निजी चिकित्सालयों को इस संबंध में हम एक रिमाइंडर लेटर और इश्यू करेंगे और उन्हें इस मामले में जानकारी देने के लिए कहेंगे। मेडिकल स्टोर्स पर टीबी की दवा बिकने के मामले में कार्यवाही का अधिकार ड्रग इंस्पेक्टर का है।
डॉ एके शिवानी, अधीक्षक डीएसपीएम अस्पताल
कार्रवाई करेंगे
हमने इस संबंध में पहले भी लेटर जारी किया जा चुका है कि निजी अस्पतालों को उनके यहां आने वाले टीबी मरीजों की जानकारी भेजना है। उन्हें ट्रीटमेंट नहीं देना है बावजूद उसके अगर वे ऐसा करते हैं तो यह गलत है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ संजय पुरोहित, जिला क्षय अधिकारी होशंगाबाद