Makar Sankranti mela: नर्मदा तट पर आस्था, इतिहास और परंपरा का अद्भुत संगम एक बार फिर सजीव होने जा रहा है। 1100 वर्ष पुराने मकर संक्रांति मेले में तिल, तर्पण और तप की परंपरा श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी।
MP News: जबलपुर के तिलवाराघाट पर मकर संक्रांति को लगने वाला मेला 14 जनवरी से आरम्भ हो जाएगा। यह मेला ऐतिहासिक व 1100 वर्ष पुराना है। संक्रांति पर इस घाट में तिल वारने (अर्पित करने) की परंपरा के चलते ही इस घाट का नाम तिलवाराघाट (Tilwara Ghat) पड़ा था। नर्मदा के किनारे मकर संक्रांति पर्व भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। इसे देखते हुए नर्मदा के गौरीघाट, जिलहरीघाट, लम्हेटाघाट, भेड़ाघाट व तिलवाराघाट में तैयारियां जोरों पर है। नर्मदा के घाटों पर पहले से ही दुकानें लगने लगी हैं। तीर्थ पुरोहितों ने भी अनुष्ठान कराने की तैयारी कर ली है।
तिलवारा घाट में त्रिपुरी राजवंश के समय से यानी करीब 1100 साल से अलग-अलग स्वरूप में मकर संक्रांति का मेला (Makar Sankranti Mela) लग रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, संक्रांति के दिन नर्मदा जी में तिल वारने (अर्पित करने) की परंपरा से ही इसका नाम तिलवारा घाट पड़ा है। इतिहासकार डॉ आनंद राणा कहते है कि कलचुरि राजवंश के युवराज देव प्रथम (वर्ष 915-945) बड़े प्रतापी राजा थे। राजा युवराज देव का विवाह दक्षिण के चालुक्य वंश के राजा अवनि वर्मा की बेटी नोहला देवी से हुआ था। नोहला देवी शिव उपासक थीं और नर्मदा शिव की पुत्री हैं। नोहला देवी तिलवारा घाट पर मकर संक्रांति पर तिल वारने आती थीं।
तिलवाराघाट पर कल्चुरीकालीन प्राचीन शिव मंदिर भी है। इस मंदिर में मकर संक्रांति पर भगवान शिव को तिल चढ़ाया जाता है। इसलिए इन महादेव का नाम तिल भांडेश्वर महादेव पड़ गया है। इस घाट पर पूजा पाठ करने वाले गंगा चरण दुबे ने बताया कि कई लोग अपने पूर्वजों की याद में तिल से तर्पण करते हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला ने बताया कि पंचांग के अनुसार, सूर्यदेव का मकर राशि में संक्रमण 14 जनवरी की रात 9.48 बजे होगा। वहीं ज्योतिषाचार्य सौरभ दुबे के अनुसार. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात को होगा।
ज्योतिर्विदों का कहना है कि इसीलिए उदयातिथि की मान्यता के अनुसार इस बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय के साथ शुरू हो जाएगा। यह शाम को सूर्यास्त तक रहेगा। महापुण्य काल सूर्योदय से दोपहर 1. 48 बजे तक रहेगा। (MP News)