राहगीरों के लिए भी चायनीज मांझा कम खतरनाक नहीं है। दोपहिया वाहन चालकों के गले या चेहरे पर अचानक मांझा लगने से गंभीर हादसे होने की संभावना रहती है।
Chinese manjha : शहर में मकर संक्रांति नजदीक आते ही पतंगबाजी का उत्साह चरम पर है, लेकिन इसी के साथ एक गंभीर और जानलेवा खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रतिबंध के बावजूद चायनीज मांझे की खुलेआम बिक्री न सिर्फ बच्चों, पक्षियों और राहगीरों के लिए खतरा बन रही है, बल्कि बिजली विभाग के लिए भी यह बड़ी चिंता का कारण बन चुका है। शहर के विभिन्न इलाकों में हर रोज 150 से 200 चरखी चायनीज मांझे की बिक्री हो रही है, मकर संक्रांति के त्योहार को देखते हुए पतंग कारोबारियों ने पहले से ही भारी स्टॉक जमा कर रखा है।
जानकारों के मुताबिक चायनीज मांझा बेहद मजबूत और नुकीला होता है, जो सामान्य सूती या कांच लगे मांझे की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक है। इसकी वजह से बच्चों की उंगलियां कटने के कई मामले सामने आ चुके हैं। पतंग उड़ाते समय या मांझा लपेटते वक्त हल्की सी चूक गंभीर चोट में बदल जाती है। शहर के अस्पतालों में आए दिन ऐसे पीडि़त बच्चे व युवा इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनकी उंगलियों, हथेलियों या गर्दन पर गहरे घाव पाए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह मांझा तांत (सिंथेटिक फाइबर) से बना होने के कारण आसानी से टूटता या नष्ट नहीं होता, जिससे चोट की गंभीरता और बढ़ जाती है।
चाइनीज मांझा सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पक्षियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। कुछ महीने पहले सूपाताल कब्रिस्तार में एक मादा बाज का पैर चाइनीज मांझे में फंस गया था। बाज को पकडकऱ जांच की तो पता चला कि बाज का बायां पंजा कट कर लग हो गया था। वह समीप झाड़ी में माझे में फंस गई थी और खुद को छुड़ाने के प्रयास में माझे की धार ने उसके पंजे को काट दिया, जिसके कारण रक्त स्राव तेजी से हो रहा था।
इसी तरह नए साल के मौके पर त्रिमूर्ति नगर में कुछ बच्चे पतंग उड़ा रहे थे। खींच तान के चक्कर में दो बच्चों के हाथ कट गए थे। जिन्हें तत्काल परिजन डॉक्टरों के पास ले गए, जहां उनकी पट्टी की गई।
राहगीरों के लिए भी चायनीज मांझा कम खतरनाक नहीं है। दोपहिया वाहन चालकों के गले या चेहरे पर अचानक मांझा लगने से गंभीर हादसे होने की संभावना रहती है। जिसके चलते पिछले साल तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना इसकी बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी थी। इसके बावजूद शहर की दुकानों में इसकी बिक्री धड़ल्ले से जारी है। जल्द ही शहर में पतंग के मुकाबलों का आयोजन होने वाला है, जिससे खतरा और बढऩे की आशंका है।
फुटाताल, नया मोहल्ला, चार खम्भा, गढ़ा, आईटीआई के पतंग व्यापारियों के अनुसार शहर में रोजाना 200 चरखी चाइनीज मांझे की खपत हो रही है। एक चरखी में 100 मीटर मांझा आता है। इस हिसाब से दो हजार मीटर मांझा प्रतिदिन बेचा जा रहा है।
चाइनीज मांझा चोरी छिपे शहर में पहुंच रहा है। कटनी, इंदौर, सूरत, गुजरात के अन्य राज्यों समेत महाराष्ट्र से चाइनीज मांझा जबलपुर पहुंच रहा है।
एम पी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइनों के समीप चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गत वर्ष रोको-टोको अभियान चलाना पड़ा था। बिजली कंपनियों का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा के साथ पतंग फंसने की घटनाओं के बाद विद्युत व्यवधान हुआ था तथा पतंग उड़ाने वालों को भी नुकसान पहुंचा था। चीन से आने वाले इस मांझे में कई तरह के केमिकल और धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो डोरी को बिजली का सुचालक बना देता है। इसके बिजली लाइनों के संपर्क में आने पर पतंग उड़ाने वाले के लिये घातक हो जाता है। जबलपुर में ऐसे क्षेत्र पोलीपाथर, शास्त्री नगर, करमेता, अधारताल कंचनपुर के क्षेत्र है, जो चाइनीस मांझे के साथ पतंग उड़ाने के प्रति संवेदनशील माने गए हैं।