100 साल पुराना है ये नृसिंह मंदिर, प्रतिमा से निकलती है स्वर्ण आभा 

संस्कारधानी में धार्मिक स्थानों की कमी नहीं है, लेकिन यहां एक ऐसा भी मंदिर है जिसका नाममात्र ही उसके प्रति अटूट श्रद्धा जगा देता है।

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Oct 28, 2015
temple
जबलपुर। वैसे तो संस्कारधानी में मंदिर और धार्मिक स्थानों की कमी नहीं है, लेकिन यहां एक ऐसा भी अद्भुत मंदिर है जिसका नाममात्र ही उसके प्रति अटूट श्रद्धा का भाव जगा देता है। ये मंदिर भी कई प्राचीन स्थानों की तरह ही अपने आप में करीब सौर वर्षों का अनूठा इतिहास समेटे हुए है।

प्राचीन मठ-मंदिर संस्कारधानी की पहचान और शान हैं। इन्हीं में शुमार है छोटी लाइन के समीप शास्त्री ब्रिज के नीचे स्थित नृसिंह मंदिर। यह जबलपुर का एक मात्र मंदिर है जहां भगवान नृसिंह की अनूठी प्रतिमा है।
बताया जाता है कि यहां भगवान नृसिंह एक ऐसी प्रतिमा स्थापित है, जिससे सोने जैसी आभा निकलती है, जबकि इसमें सोने का नाममात्र के लिए भी मिश्रण नहीं है। ये प्रतिमा पीतल की बताई जाती है। प्रदेश ही नहीं पूरे देश से दर्शनार्थ यहां लोग आते हैं। यह मंदिर सौ साल से भी अधिक पुराना है। संतों की चौथी पीढ़ी यहां साधना कर रही है।

होगा लक्ष्मी-नृसिंह यज्ञ

मंदिर के 101 साल पूरे होने पर 15 से 22 दिसम्बर तक श्री लक्ष्मी नृसिंह महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत तत्व चिंतन सप्ताह होगा। नृसिंह पीठ के उत्तराधिकारी स्वामी नृसिंह दास ने बताया कि वर्ष 1914 में तपसी जी छावनी दिगम्बर अखाड़ा के संत महंत अयोध्यादास ने मंदिर की स्थापना की थी।
यहां स्वामी सीताराम दास, स्वामी रामचन्द्रदास ने साधना की है। अब महामंडलेश्वर स्वामी श्यामदास के सानिध्य में पूजा-अर्चना हो रही है। यहां पहली बार श्री लक्ष्मी नृसिंह महायज्ञ होने जा रहा है।
Published on:
28 Oct 2015 11:44 am
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