मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में पड़े अकाल के दौरान सभी की रक्षा की कामना के साथ गल्ला व्यवसायियों व धर्मप्रेमी नागरिकों ने कराया था। यह मंदिर आज भी आस्था का बड़ा केंद्र है।
Annapurna Mandir : शहर के बीचों-बीच निवाडग़ंज कबूतरखाना स्थित माता अन्नपूर्णा ऐतिहासिक मंदिर है। श्रद्धालुओं का दावा है कि यहां अन्नपात्र लिए हुए माता अन्नपूर्णा की प्रदेश में इकलौती प्रतिमा है। मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में पड़े अकाल के दौरान सभी की रक्षा की कामना के साथ गल्ला व्यवसायियों व धर्मप्रेमी नागरिकों ने कराया था। यह मंदिर आज भी आस्था का बड़ा केंद्र है।
अगहन माह में यहां प्रति वर्ष अनुसार विशेष पूजन, धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। छह दिसंबर को विवाह पंचमी पर यहां भगवान श्रीराम की बारात निकालकर प्रभु राम और माता सीता के विवाह की परम्परा निभाई जाएगी। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
पुजारी गोस्वामी के अनुसार पुराने दस्तावेजों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भारत में सबसे पहले काशी में मां अन्नपूर्णा के मंदिर का निर्माण हुआ था। बाद में जबलपुर में इस धाम का निर्माण हुआ। उनके अनुसार यह प्रदेश में अन्नपूर्णा माता का इकलौता मंदिर है, जहां जगतजननी हाथ में खाद्यान्न का पात्र लिए विराजमान हैं। गर्भगृह में भगवान लक्ष्मीनारायण तथा राधाकृष्ण की भव्य नयनाभिराम प्रतिमाएं स्थापित हैं।
इतिहासकार डॉ. आनन्द सिंह राणा ने बताया कि 19वीं शताब्दी के आखिरी दशक में मध्यभारत में भीषण अकाल पड़ा था। तब जबलपुर की गल्ला व्यापारियों व आसपास के लोगों ने माता अन्नपूर्णा का आह्वान कर इस विभीषिका को दूर करने की प्रार्थना की। जल्द ही अकाल दूर हो गया। इसके बाद सभी ने मिलकर मंदिर निर्माण कराया, और माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा स्थापित की गई। निर्माण 1875 में प्रारंभ हुआ और शताब्दी के अंत तक कार्य पूर्ण हुआ। मंदिर के सेवक संजय गोस्वामी ने बताया कि मंदिर निर्माण के समय से ही उनके पूर्वजों को मंदिर की व्यवस्थाएं, सेवा और पूजन की जिम्मेदारी दी गई थी। जो कि गोस्वामी परिवार द्वारा आज भी जारी है। माता अन्नपूर्णा की आराधना के व्रत अगहन मास में 21 दिन तक किए जाते हैं। कृष्ण पक्ष की पंचमी 20 नवम्बर से यह व्रत महोत्सव प्रारंभ हुआ। समापन अगहन माह की पूर्णिमा को होगा। कुछ व्रतधारियों द्वारा 5, 11 तथा 17 दिन के व्रत किए जाते हैं।
मंदिर दूर से भी देखने पर अपनी भव्यता का प्रदर्शन करता है। इसके निर्माण में उपयोग की गई स्थापत्य कला प्राचीन कलाकारों के बेहतर हुनर को प्रदर्शित करती है। मंदिर बेहद आकर्षक है।