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अकाल में किया माता का आह्वान, खत्म हुआ तो बनाया माता अन्नपूर्णा का मंदिर

निवाडग़ंज के अन्नपूर्णा मंदिर की रोचक है कहानी

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maa annapurna temple

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जबलपुर। वैसे तो शहर में बहुत से सिद्ध देवी दरबार हैं जो सैंकड़ों सालों का इतिहास बयां करते हैं, लेकिन एक मंदिर ऐसा भी हो तत्कालीन विभीषिका को याद दिलाने और अनाज के एक एक दाने की कद्र करने का संदेश देता है। जी हां. हम बात कर रहे हैं निवाडग़ंज गल्ला मंडी स्थित माता अन्नपूर्णा मंदिर की। जिसके बारे में मान्यता है कि यहां प्रार्थना करने वालों के घर में कभी भंडार खाली नहीं होते हैं। अगहन माह में यहां विशेष पूजन, धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

गल्ला व्यापारियों, साहूकारों ने मिलकर कराया निर्माण
गोस्वामी परिवार को मिली सेवा और व्यवस्था की जिम्मेदारी

1895 में अकाल पड़ा, माता से की प्रार्थना
इतिहासकार राजकुमार गुप्ता ने बताया साल 1895 में जब यहां अकाल पड़ा तो लोग दाने दाने को तरस गए। तब गल्ला मंडी व आसपास के संभ्रांत लोगों समेत आमजनों ने माता अन्नपूर्णा का आह्वान कर इस विभीषिका को दूर करने की प्रार्थना की। जल्द ही अकाल दूर हो गया, शहर में भरपूर अनाज, धन धान्य लौट आया। तब यहां के गल्ला व्यापारियों और साहूकारों ने मिलकर मां अन्नपूर्णा का मंदिर निर्माण कराया और उनकी प्रतिमा स्थापित की। तब ये इस मंदिर में अर्जी लगाने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती आई हैं। मंदिर के सेवक संजय गोस्वामी ने बताया मंदिर निर्माण के समय से ही उनके पूर्वजों को मंदिर की व्यवस्थाएं, सेवा और पूजन की जिम्मेदारी दी गई थी, जो कि गोस्वामी परिवार द्वारा आज भी अनवरत जारी है।

अगहन माह में होते हैं विशेष आयोजन
संजय गोस्वामी ने बताया शास्त्रों के अनुसार माता अन्नपूर्णा का व्रत महोत्सव अगहन माह की पंचमी से शुरू होते हैं। 16 और 21 दिनों तक लोग व्रत पूजन करते हैं। मंदिर में व्रतधारी महिलाओं व अन्य भक्तों द्वारा विशेष पूजन, आरती आदि किए जाते हैं। इस साल 13 नवंबर से अन्नपूर्णा महोत्सव की शुरुआत कलश यात्रा हो रही है। 28 को श्रीराम जानकी विवाहोत्सव होगा, 29 को चंपा षष्टी मनाई जाएगी। 8 दिसम्बर को व्रत समापन, हवन पूजन व भंडारा प्रसाद वितरण होगा। मंदिर में मां अन्नपूर्णा के साथ ही भगवान राधाकृष्ण एवं लक्ष्मीनारायण की मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित हैं।

16 से 21 दिन रखे जाते हैं व्रत
ज्योतिषाचार्य सचिनदेव महाराज के अनुसार 13 नवंबर को कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से मां अन्नपूर्णा का व्रत पूजन शुरू होता है। कुछ लोग 16 दिवसीय व्रत रखते हैं तो कुछ 21 दिनों तक माता का व्रत पूजन करते हैं। इसके अलावा कई लोग 5 और 11 दिन के व्रत भी अपनी सुविधा के अनुसार रखते हैं।

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