
arm alignment band
जबलपुर। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन इन मैन्युफैक्चरिंग के स्टूडेंट्स और प्रोफेसरों ने मिलकर एक ऐसी डिवाइस तैयार की है जो पसीने लोगों की बीमारी का पता लगा सकता है। छात्रों ने इसे आर्म एलाइनमेंट स्वेट बैंड नाम दिया है। यह डिवाइस पसीने में होने वाले परिवर्तन से शरीर में होने वाली बीमारी की जानकारी दे देगा। इसे हर स्तर पर परखने के बाद ट्रिपलआईटीडीएम के छात्रों की इस खोज को पेटेंट भी मिल गया है। उल्लेखनीय है कि अभी इंसानों में होने वाली बीमारियों की जांच के लिए खून, पेशाब या मल आदि का उपयोग किया जाता है।
एक साल पहले मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के छात्र अर्क पाटिल, मयूर कुमार, सहित पांच छात्रों ने असि. प्रोफे. डॉ. अविनाश रविराजा को यह आइडिया दिया। मयूर और अर्क पाटील ने एक सिनॉप्सिस जमा की. जिसमें उन्होंने एक स्वेट बैंड के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रोफे. डॉ. अविनाश को बताया कि वे ऐसी डिवाइस बनाना चाहते हैं जो पसीने में होने वाले परिवर्तन से ही बीमारियों का पता लगा सके साथ ही शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंज भी इसके जरिए देखे जा सकें। इसके बाद इस प्रोजेक्टर पर काम शुरू किया गया।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असि. प्रोफे. डॉ अविनाश रविराजा ने बताया इस बैंड को बनाने में हमें एक साल का समय लगा। करीब आधा साल केवल मॉडल बनाने में लगा। इसके बाद बाकी के छह महीने में हमने दिन रात एक करके इसे तैयार किया। जबलपुर के आधा दर्जन वरिष्ठ चिकित्सकों से इसका परीक्षण कराया गया। उन्होंने लिखकर दिया है कि इसकी एक्यूरेसी 95 प्रतिशत के आसपास पाई गई है। इस बैंउ का 100 से ज्यादा लोगों पर ट्रायल किया गया। इसके बाद अंतत: इसे बनाने में सफलता मिली। इसे कमर्शियल लाने की तैयारी भी कर रहे हैं। इस पर ट्रिपलआईटीडीएम प्रबंधन ने काम शुरू कर दिया है।
डॉ. अविनाश रविराजा ने बताया आर्म एलाइनमेंट स्वेट बैंड में कई माइक्रो सेंसर लगाए गए हैं। जिनमें नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 3 लेयर तैयार है, इसमें लगे कैपेसिटर पसीने से चार्ज होते हैं. फिर उससे मिले डाटा को मैग्नीफाइंग डिवाइस में डालकर पहले से प्रूवन डाटा से मैच किया जाता है। इसमें पसीने की पीएच वैल्यू भी देखी जाती है। अभी इसेे आर्म के लिए तैयार किया है, लेकिन इस शरीर के किसी भी दूसरी हिस्से व ग्रंथि के लिए तैयार किया जा सकता है, क्योंकि हर ग्रंथि से अलग किस्म का पसीना निकलता है।
छात्रों ने बताया यह एक प्रेडिक्शन मॉडल है जो शरीर को बिना किसी नुकसान पहुंचाए उपयोग किया जा सकता है। आम लोगों के साथ ये एथलीट्स के लिए बहुत काम का है। क्योंकि पसीना सोखकर ही ये उसकी बीमारियां बताने में सक्षम है।
डॉ अविनाश रविराजा ने बताया कि बैंड तैयार होने के बाद इसे पेटेंट के लिए भेजा गया और जल्द ही इसे पेटेंट भी मिल गया। देश के कई जाने-माने प्रोफेसर ने उनकी खोज की सराहना की. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बेंगलुरु से इस खोज को सेकंड प्राइज मिला है। इसके साथ ही डीआरडीओ के डायरेक्टर ने भी इस खोज की सराहना की है। इसे बनाने में करीब 30 हजार रुपए की लागत आई है।
Updated on:
06 Feb 2026 11:20 am
Published on:
06 Feb 2026 11:20 am
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