गर्मी में कोल्ड ड्रिंक के कार्बोनेशन पर असर, बन रहा धीमा जहर- पढ़ें पूरी खबर
जबलपुर. गर्मी में ठंडक के लिए पी जाने वाली कोल्ड ड्रिंक्स और फ्रूट ज्यूस सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। कंपनियां और कारोबारी इसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दुकानों के सामने इनकी बोतल 40 डिग्री तापमान में बाहर रखी जा रही हैं। ऑटो में तेज धूप के बीच परिवहन होता है। जानकारों के अनुसार इससे यह नुकसानदायक हो जाती है।
गर्मी में बढ़ा कारोबार
शहर में गर्मी के चलते मई-जून में कोल्ड ड्रिंक्स और फ्रूट ज्यूस के साथ बोतलबंद पानी का कारोबार तेजी से बढ़ा है। कई जगहों पर इसकी बोतलों को रखने के लिए तय किए गए तापमान का खयाल नहीं रखा जाता है। जानकारों का कहना है कि कम से कम कमरे के तापमान पर इसको स्टोर किया जाना चाहिए। ज्यादा तापमान में कई प्रकार के कंपाउंड बेातल के अंदर बन जाते हैं।
निरंतर चलती हैं जांच
खाद्य एवं सुरक्षा प्रशासन की निरीक्षक माधुरी मिश्रा ने बताया कि कोल्ड ड्रिंक्स, पानी और फ्रूट ज्यूस की बोतलों के सेंपल लेकर उनकी जांच की जाती है। कुछ जगहों पर ऐसी बोतलें जब्त कर उन्हें नष्ट करने की कार्रवाई की गई है। तेज धूप के प्रभाव से इसके कारबोनेशन पर असर होता है।
करोड़ों रुपए का कारोबार
जिले में कोल्ड ड्रिंक्स और फ्रूट ज्यूस का बड़ा कारोबार है। गर्मी के मौसम में इनकी प्रतिदिन 35 से 40 हजार पेटी की खपत होती है। 8 से 10 लाख रुपए का रोजाना का कारोबार है। कई बड़ी कंपनियों के अलावा प्रदेश एवं स्थानीय स्तर की कंपनियां भी इन उत्पादों को बाजार में बेचती हैं। जिस प्रकार आइसक्रीम में कोल्ड चेन होती है, वैसा ध्यान इन उत्पादों पर नहीं दिया जाता है। कोल्ड ड्रिंक्स में पेस्टीसाइड और कई प्रकार रंगों का इस्तेमाल होता है। प्लास्टिक की बोतल के कारण उसका रेडीयेशन पहले ही उसमें रहता है।
कोल्ड ड्रिंक्स का लगातार सेवन सेहत के लिए हानिकारक होता है। इसमें कलर एजेंट के साथ दूसरे रसायनों का उपयोग किया जाता है। इससे लीवर और किडनी पर प्रभाव पड़ता है। धूप की हीट से केमिकल मॉनिक्यूल टूटते हैं। मॉलिक्यूल टूटकर नया कंपाउंड बना लेते हैं।
डॉ संदीप भगत, मेडिसिन स्पेशलिस्ट